यूरोप को हथियार सप्लाई करने वाला दूसरा बड़ा देश बना भारत, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रक्षा निर्यात में 1600% की बढ़ोतरी

नई दिल्ली । भारत वैश्विक रक्षा निर्यात के क्षेत्र में तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोपीय देशों में गोला-बारूद की बढ़ती मांग के बीच भारत एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। ट्रेड डेटा मॉनिटर के आंकड़ों के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने यूरोपीय देशों को करीब 8,271 करोड़ रुपये के गोला-बारूद की आपूर्ति की है। इनमें आर्टिलरी शेल और मोर्टार के गोले शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी और मध्य यूरोप में भारत का रक्षा निर्यात लगभग 1600 प्रतिशत बढ़ा है। चार साल पहले इस क्षेत्र में गोला-बारूद आपूर्तिकर्ताओं की सूची में 28वें स्थान पर रहने वाला भारत अब दक्षिण कोरिया के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

यूरोप की बढ़ती मांग से भारतीय रक्षा उद्योग को फायदा

रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 में शुरू हुए युद्ध ने यूरोप की रक्षा जरूरतों को काफी बढ़ा दिया है। लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण गोला-बारूद के भंडार को फिर से भरने और सैन्य तैयारियों को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी मांग के बीच भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए निर्यात के नए अवसर बने हैं।

रक्षा व्यापार पर शोध करने वाली स्वीडन की संस्था SIPRI के वरिष्ठ शोधकर्ता सिमोन वेजमैन के अनुसार, यूक्रेन की जरूरतों और यूरोपीय देशों की बढ़ती रक्षा मांग को पूरा करने के लिए भारत से गोला-बारूद खरीदा जा रहा है।

किंग्स कॉलेज लंदन के राजनीति विज्ञानी वॉल्टर लाडविग के मुताबिक, भारतीय कंपनियां सीधे यूक्रेन को हथियार देने के बजाय यूरोपीय देशों को रक्षा सामग्री बेच रही हैं। इस तरह भारत यूरोप की रक्षा आपूर्ति व्यवस्था में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है।

इजराइल को भी रक्षा सामग्री की आपूर्ति बढ़ी

भारत का रक्षा निर्यात केवल यूरोप तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 तक भारत इजराइल को विमान, हेलिकॉप्टर और ड्रोन के पुर्जे उपलब्ध कराने वाला तीसरा सबसे बड़ा विदेशी आपूर्तिकर्ता बन गया था। वर्ष 2023 में भारत इस श्रेणी में नौवें स्थान पर था।

इसके अलावा, पिछले दो वर्षों में मार्च 2026 तक भारत ने इजराइल को लगभग 630 करोड़ रुपये मूल्य के आर्टिलरी शेल, मोर्टार राउंड और विस्फोटक निर्यात किए। रिपोर्ट के अनुसार, यह मात्रा इससे पहले के छह वर्षों के कुल निर्यात के बराबर थी।

ये आंकड़े पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के बीच भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता और अंतरराष्ट्रीय रक्षा व्यापार में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं।

घरेलू रक्षा उद्योग बना निर्यात का आधार

भारत के रक्षा उद्योग में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उत्पादन क्षमता बढ़ाने और घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है। गोला-बारूद, सैन्य उपकरणों और रक्षा क्षेत्र के विभिन्न कलपुर्जों के निर्माण में भारतीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ी है।

यूरोप और पश्चिम एशिया में रक्षा सामग्री की मांग बढ़ने से भारतीय निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत करने का अवसर मिला है। हालांकि, निर्यात के इस विस्तार को बनाए रखने के लिए उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता, समय पर आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन महत्वपूर्ण होगा।

रूस-यूक्रेन युद्ध ने बदली वैश्विक रक्षा जरूरतें

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध फरवरी 2022 से जारी है। इस संघर्ष में बड़े पैमाने पर सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल हुआ है और दोनों पक्षों की गोला-बारूद की जरूरत लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। युद्ध के कारण यूरोपीय देशों ने भी अपने रक्षा भंडार और सैन्य तैयारियों को मजबूत करने पर ध्यान दिया है।

बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग के बीच भारत का रक्षा निर्यात में आगे बढ़ना देश के विनिर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यूरोप में दूसरे बड़े गोला-बारूद आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की स्थिति मजबूत होना इस बात का संकेत है कि भारतीय रक्षा उद्योग वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अपनी भागीदारी बढ़ा रहा है।

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