शिवरीनारायण — छत्तीसगढ़ महाविद्यालयीन अतिथि व्याख्याताओं का अनिश्चित धरना आंदोलन दिनांक 05.05 2022 को प्रातः 10:00 बजे से बूढ़ा तालाब रायपुर में छत्तीसगढ़ अतिथि व्याख्याता समूह के अध्यक्ष-लव कुमार वर्मा,उपाध्यक्ष आशा आजाद,शिवम पटेल,सी.पी वर्मा, जया गुफ्ता, कंचन गिलहरे,हर्षद चद्राकर, आदि समस्त पदाधिकारियों के नेतृत्व में इस इस आंदोलन में पाँचो संभाग के अतिथि व्याख्याता,प्रभावित अप्रभावित अ.व्या.उपस्थित हो रहें है। विशाल रूप से किया जा रहा है। इस धरने का मुख्य उद्देश्य है कि वर्तमान सरकार द्वारा जन घोषणा में किए गए वादों को साढ़े तीन वर्ष होने के पश्चात भी पूरा नहीं किया गया। विगत कई वर्षों से उच्च शिक्षा में अपना अमूल्य योगदान दे रहे अतिथि व्याख्याता के साथ वर्तमान की छत्तीसगढ़ की सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है। नियमित सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति से 1000 से भी अधिक लोग प्रभावित हो चुके हैं जो वर्तमान में बेरोजगारी की विकट समस्या से जूझ रहे हैं इस स्थिति में अतिथि व्याख्याता अपने दायित्वों का निर्वहन किस प्रकार से करेंगे इस पर प्रश्नवाचक सरकार के सामने खड़ा होता है। विगत कई वर्षों से धरना आंदोलन नित्य चल रहा है लेकिन कांग्रेस की सरकार अतिथि व्याख्याता की मांगों को लेकर सक्रियता नहीं दिखा रही है। दिहाड़ी वेतन प्राप्त करने वाले अतिथि व्याख्याता यह आंदोलन करने पर विवश है। महाविद्यालय में चपरासी के पोस्ट पर रहने वाले कर्मचारी से भी कम महाविद्यालयीन अतिथि व्याख्याताओं की वेतन है, फिर भी मूकदर्शक बनकर यह सरकार हमारा शोषण कर रही है। वर्तमान में बढ़ती हुई महंगाई से जूझ पाना बहुत मुश्किल हो रहा है ऐसे में वर्तमान सरकार हमारी परेशानियों को देखकर भी अनदेखा कर रही है इसलिए अतिथि व्याख्याताओं द्वारा विशाल रूप से अनिश्चित आंदोलन किया जा रहा है जिसमें तीन सूत्रीय मांगों का उल्लेख किया गया है

1- प्रभावित अतिथि व्याख्याताओं की पुर्ननियुक्ति
2- 65 साल की जॉब सिक्योरिटी
3-पूर्णकालिक अवधि एक मुस्त वेतन
को मांग को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार के समक्ष आंदोलन छेड़ दिया है।अतिथि व्याख्याताओं का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार के समक्ष विभिन्न सांसदों विधायकों एवं अतिथि व्याख्याताओं द्वारा विभिन्न जिलों में विभिन्न संभागों में ज्ञापन सौंपा गया किंतु मुख्यमंत्री द्वारा एक बार भी उनकी समस्याओं को सुनने की अनुमति प्रदान नहीं की गई। महाविद्यालय अतिथि व्याख्याता जो उच्च शिक्षा विभाग में अपना विशेष योगदान विगत कई वर्षों से देते आ रहे है और छत्तीसगढ़ का मान बढ़ा रहे है क्या मुख्यमंत्री उनसे एक बार रूबरू होकर उनकी मांगो को नहीं सुन सकते , इन सभी परिस्थितियों को देखकर छत्तीसगढ़ के समस्त अतिथि व्याख्याता ने अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन पर बैठने का विचार किया है और छत्तीसगढ़ राज्य की सरकार से यही आशा करती है कि हम अतिथि व्याख्याताओं को हमारे राज्य में मान सम्मान से जीने का अधिकार प्रदान करें एवं हमारे साथ न्याय करें।महाविद्यालयीन अ.व्या.का कहना है कि आंदोलन तब तक समाप्त नहीं किया जाएगा जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होती।