HDFC बैंक पर 45 करोड़ छिपाने का आरोप! ‘अतिरिक्त ब्याज’ को मार्केटिंग खर्च बताकर किया भुगतान?

नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC बैंक एक बड़े वित्तीय विवाद में घिरता नजर आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंक पर महाराष्ट्र की सरकारी कंपनी महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) को दिए गए करोड़ों रुपये के अतिरिक्त ब्याज भुगतान को मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाने का आरोप लगा है। मामले को लेकर बैंक की ऑडिट समिति ने आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, HDFC बैंक की ऑडिट कमेटी ऑफ बोर्ड (ACB) ने 12 मार्च 2026 को वित्त वर्ष 2024 और 2025 के दौरान MSRDC को किए गए करीब 45 करोड़ रुपये के भुगतान की ‘इंटरनल विजिलेंस इन्वेस्टीगेशन’ कराने का फैसला लिया था। यह जांच कथित वित्तीय अनियमितताओं और भुगतान की प्रकृति को समझने के लिए शुरू की गई।

बताया जा रहा है कि यह मामला साल 2021 में शुरू हुआ, जब HDFC बैंक ने MSRDC से उसके बड़े फंड बैंक में जमा कराने के लिए संपर्क किया। उस समय निगम के पास भूमि अधिग्रहण परियोजनाओं से मिले करीब 25 हजार करोड़ रुपये मौजूद थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, निगम ने बैंक से कहा कि कुछ अन्य वित्तीय संस्थान बचत खाते पर 6 प्रतिशत ब्याज दे रहे हैं और यदि HDFC इससे अधिक यानी 6.01 प्रतिशत ब्याज देगा तो वह अपनी रकम HDFC में जमा करेगा।

सूत्रों के अनुसार, उस समय HDFC बैंक अपने सामान्य बचत खातों पर केवल 3.5 प्रतिशत ब्याज दे रहा था। बाद में बैंक ने बड़े डिपॉजिट के लिए 4.5 प्रतिशत ब्याज का नया नियम बनाया, लेकिन यह भी तय वादे से कम था। आरोप है कि बाकी अतिरिक्त भुगतान को बैंक ने सीधे ब्याज के रूप में दिखाने के बजाय दूसरे माध्यम से भुगतान किया।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बैंक ने अपने मार्केटिंग विभाग के जरिए चार स्थानीय विक्रेताओं के माध्यम से यह रकम जारी करवाई और इसे ‘रोड सेफ्टी अवेयरनेस कैंपेन’ में योगदान के रूप में दिखाया गया। जांच रिपोर्ट में इसे ‘परोक्ष ब्याज क्षतिपूर्ति’ बताया गया है।

मामले के सामने आने के बाद बैंक के तत्कालीन चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के इस्तीफे को भी इससे जोड़कर देखा जा रहा है। 18 मार्च 2026 को उन्होंने अचानक पद छोड़ दिया था। अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा था कि बैंक में पिछले दो वर्षों के दौरान कुछ ऐसी घटनाएं हुईं जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता से मेल नहीं खातीं।

हालांकि, HDFC बैंक ने इन आरोपों को खारिज किया है। बैंक ने 27 मई को जारी बयान में कहा कि उसके कामकाज में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हुई है और मीडिया में सामने आई बातें केवल “कयास” हैं। बैंक ने दावा किया कि संस्थान में निगरानी और अनुपालन की मजबूत व्यवस्था मौजूद है, जो किसी भी संभावित अनियमितता को रोकने में सक्षम है।

फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर बैंकिंग और वित्तीय जगत में चर्चाएं तेज हैं और सभी की नजर आंतरिक जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।

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