असली वंदन अगले साल से
छत्तीसगढ़ की विष्णु सरकार राज्य की महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये प्रदान कर रही है। हालांकि यह राशि मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और बंगाल में दी जाने वाली राशि से काफी कम है। लेकिन चिंता करने की कोई बात नहीं है। दरअसल विष्णु सरकार अगले साल से छत्तीसगढ़ की महिलाओं को प्रदान की जाने वाली महतारी वंदन की राशि को 1000 से बढ़ाकर 2000 रुपये प्रतिमाह कर सकती है। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बीते कैबिनेट के बाद अपने साथियों से 2028 के विधानसभा चुनाव जीतने का रोडमैप जाना तो उसमें से किसी एक साथी ने महतारी वंदन की राशि को चुनाव के एक साल पहले 1000 से बढ़ाकार 2000 रुपये प्रतिमाह करने की सलाह दी, वहीं बिजली बिल हाफ करने की भी बात सामने आई है। कुल मिलाकर अगले साल से असली वंदन होगा। इतना ही नहीं कहते हैं कि इसके लिए बजट खाका तैयार करने की भी बात सामने आई है। दरअसल महतारी वंदन की राशि को दोगुना करके राज्य की महिलाओं को भाजपा अपने फेवर में कर सकती है। वहीं चुनावी घोषणा पत्र में महतारी वंदन की राशि को 2000 से बढ़ाकर 2500 तक भी करने का ऐलान किया जा सकता है।
लाखों रुपये के बिल का सच क्या?
राज्य के एक संवैधानिक संस्था के प्रमुख इन दिनों काफी बीमार हैं, अथवा वह बीमार नहीं हैं, इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं। दरअसल कहा जा रहा है कि साहब के कार्यालय में इन दिनों इलाज के लिए लाखों रुपये के बिल लगाए जा रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि यदि साहब बीमार हैं तो उन्हें इस संवैधानिक पद की जबाबदारी क्यों दी गई है? अथवा वह स्वस्थ हैं तो इलाज के नाम पर लाखों के बिल क्यों लगाए जा रहे हैं? कहा तो यह भी जाता है कि साहब इलाज के लिए हर पंद्रह दिन में राजधानी से बाहर जाते हैं। अब जाहिर सी बात है कि रायपुर में बीमारी का इलाज संभव नहीं होगा? तभी तो अन्य शहर का रुख करना पड़ रहा है। इस संस्था में ऑडिट भी नहीं किया जाता कि बीमारी अथवा इलाज के बिलों के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। इसलिए सरकार को ही तय करना चाहिए कि यदि वास्तव में साहब बीमार हैं तो उन्हें जवाबदारी से मुक्त कर दें अथवा उनके कार्यालय में लगाए जा रहे लाखों के बिलों की पडताल करें।
स्मृति के फीडबैक के बाद ही कुछ संभव
छत्तीसगढ़ भाजपा की नवनियुक्त प्रभारी स्मृति ईरानी अगले रविवार को छत्तीसगढ़ आ रही हैं। कहा जा रहा है कि स्मृति ईरानी पहले संगठन के पदाधिकारियों के साथ वन-टू-वन चर्चा करेंगी। उसके बाद मुख्यमंत्री तथा मंत्रियों से राज्य सरकार की योजनाओं और मोदी की गारंटी की समीक्षा करेंगी। हालांकि इस बीच मंत्रिमंडल में फेरबदल के कयास भी लगाए जा रहें, जो फिलहाल टलते दिख रहा है। पार्टी के उच्चस्थ सूत्रों की माने तो राज्य मंत्रिमंडल में फेरबदल अभी कुछ दिनों तक टाला जा सकता है। दरअसल इन दिनों केन्द्र सरकार में भी आंतरिक रुप से घमासान मचा हुआ है। पार्टी में अंदर ही अंदर कई मंत्रियों के खिलाफ विरोध के स्वर उठ रहे हैं, ऐसे में राज्य मंत्रिमंडल से पहले केन्द्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव संभव है। उसके बाद ही राज्य मंत्रिमंडल में नए चेहरे सपथ लेंगे।
बिक जाएगा बीएसपी या अफवाह फैला रहे भूपेश ?
उद्योगपति गौतम अडानी का नाम आते ही छत्तीसगढ़ की जनता के मन में यहां की विरासत के बिकने का भय सताने लगता है। दरअसल छत्तीसगढ़ में अडानी समूह का बड़ा कारोबार है। यहां जिन संस्थानों के मालिक पहले कोई और हुआ करते थे उन पर अब अडानी समूह का कब्जा हो चुका है। वर्तमान में अडानी ने अडानी सीमेंट जामुल, अडानी सीमेंट मस्तूरी, अडानी पावर रायगढ़, अडानी पावर कोरबा, हसदेव परियोजना सरगुजा, पीइकेबी माइंस, अडानी पावर रायपुर, अडानी सीमेंट बलौदाबाजार पर मालिकाना हक हासिल कर लिया है। इसके बाद अब छत्तीसगढ़ की विरासत बीएसपी के निजीकरण की खबरें बाजार में तैरने लगी हैं। यह खबर अफवाह है अथवा सच इसे जानने लिए फिलहाल अभी इंतजार करना पड़ेगा। लेकिन इस बीच पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा है कि अडानी बीएसपी को देखने आने वाले हैं। बघेल ने सवाल उठाया है कि अडानी के बीएसपी आने का मतलब क्या है? उनका कहना है कि अडानी का अब बीएसपी पर नजर है, जिसे छत्तीसगढ़वासी किसी सूरत में बिकने नहीं देंगे। भूपेश बघेल के इस बयान के बाद इन दिनों चर्चा छिड़ी हुई है। क्या सच में बीएसपी बिकने वाला है? या फिर भूपेश बघेल की नजर भिलाई नगर निगम में होने वाले चुनाव पर है। क्योंकि बीएसपी में कार्यरत हजारों की संख्या में कर्मचारी-अधिकारी और उनका परिवार इस क्षेत्र का बड़ा वोटर है।
संविदा पर सिस्टम और बेराजगार युवा
राज्य का ज्यादातर सिस्टम इन दिनों संविदा अधिकारियों के भरोसे चल रहा है। कई महत्वपूर्ण पदों पर संविदा पर अधिकारियों को बिठाया गया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रमुख सचिव से लेकर राज्य की विद्युत कंपनियों के एमडी, बीज निगम के एमडी, वित्त विभाग के सचिव से लेकर कई कार्यालयों में संविदा में नियुक्त अधिकारी पूरा सिस्टम चला रहे हैं। वहीं दूसरी ओर राज्य के युवाओं के रोजगार को लेकर चारों ओर बहस छिड़ी हुई है। दरअसल राज्य में सरकारी क्षेत्र में भर्तियां नहीं हो पा रही हंै। सीजीपीएससी में अध्यक्ष की नियुक्ति तक नहीं की जा सकी है। निश्चित तौर पर ऐसे में छत्तीसगढ़ के युवाओं की रोजगार को लेकर चिंता स्वाभाविक है।
अरुण पांडे का विरोधी खेमा हुआ सक्रिय
हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स अरुण कुमार पांडे अपने पूरे कार्यकाल में एक र्निविवाद अफसर रहे हैं। संभवत: इसीलिए वह सरल और सहज मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पसंद हैं। अरुण पांडे हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स न बन पायें, इसके लिए कुछ माह पहले विरोधी अफसरों ने रायपुर से लेकर दिल्ली एक कर दी थी। लेकिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिना किसी राजनीतिक दबाव के अरुण पांडे को पीसीसीएफ की कुर्सी सौंप दी। बीते चार माह का कार्यकाल भी कुछ हद तक पांडे का बढिय़ा गुजरा। कार्यालयीन कामकाज के साथ ही अरुण पांडे ने फील्ड में भी सक्रियता दिखाई है, जिसके कारण धरातल में भी कार्यों में गति दिखने लगी है। लेकिन इस बीच कभी भ्रष्टाचार में गले तक डूबे अधिकारियों के एक सिंडीकेट ने अरुण पांडे और वन विभाग के खिलाफ अघोषित रुप से मोर्चा खोल रखा है।
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