Thethinkmedia@raipur
हलचल का यह सप्ताहिक कॉलम छत्तीसगढ़ की सबसे बडी पंचायत विधानसभा में हुई कुछ प्रमुख गतिविधियों पर विशेष केंद्रित किया गया है।
”तानाशाह” विष्णुदेव सरकार?
मानसून सत्र के आखिरी दिन विपक्षी दल कांग्रेस ने विष्णुदेव सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया। विष्णुदेव सरकार के 136 सप्ताह के कार्यकाल में 136 आरोप लगाए गए। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि सरकार ”तानाशाही” प्रवृत्ति अपना कर सत्ता के मद में मदमस्त हो चुकी है। 14 घंटे से ज्यादा चर्चा के बाद यह अविश्वास प्रस्ताव ध्वस्त हो गया। लेकिन इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही आक्रामक नजर आये। सीएम विष्णुदेव साय पर लगे आरोप कितना सच हैं? कितना झूठ? यह तो सदन और अध्यक्ष को तय करना था, सदन ने अपना फैसला शुक्रवार देर रात सुना दिया। लेकिन इन तमाम आरोपों में विष्णुदेव सरकार को ”तानाशाह” प्रवृत्ति का बताया गया है। सरल और सहज व्यक्ति के नाम से ख्याति प्राप्त सीएम विष्णुदेव साय को भला कौन ”तानाशाह” मानेगा? विपक्ष का यह आरोप सदन तो दूर राज्य की जनता भी नकार देगी। बाकी आरोपों के तथ्य कितने प्रमाणित हैं, इस पर तो सदन में बहस हो चुकी है। पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उनकी सरकार ”तानाशाह” है यह किसी को हजम नहीं हो रहा है।
मर्यादाओं की उड़ी धज्जियां
मानसून सत्र का आखरी दिन ऐसा भी रहा जब सदन में परमपराओं, मर्यादाओं और आचरण की धज्जियां उड़ाई गई। दरअसल उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा अविश्वास प्रस्ताव के दौरान अपनी बात रख रहे थे। इस बीच में कुख्यात नक्सलवादी हिड़मा का जिक्र हुआ। विजय शर्मा ने इस दौरान कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की एक सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र किया। जिसमें बताया गया कि राहुल गांधी ने एक पोस्ट किया था जिसमें यह कहा गया था कि ”कितने हिड़मा मारोगे, हर घर में हिड़मा पैदा होगा” जिस पर भिलाई विधायक देवेन्द्र यादव ने विधानसभा की मेंजे ठोंक-ठोंक कर, उंगलियां दिखाकर जोर-जोर से हंगामा करना शुरु कर दिया। कुल मिलाकर विधानसभा के आचरण के अनुरुप उनका प्रदर्शन नहीं रहा। पक्ष-विपक्ष सभी देवेन्द्र यादव के आचरण से हैरान नजर आये। इसी बीच रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत ने देवेन्द्र की बॉडी लैंग्वेज को लेकर विरोध किया। मूणत और देवेन्द्र में जोर-जोर से बहस होने लगी। तभी मूणत की बगल की सीट में बैठे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, जगदलपुर विधायक किरण सिंहदेव देेवेन्द्र यादव के इस आचरण से काफी खफा हो गए। एक ऐसा सीन भी देखने को मिला जब सिंहदेव ने अपनी बांहे सकेल ली। इस बीच सीनियर मंत्री रामविचार नेताम ने बड़ी ही सूझ-बूझ से किरण सिंहदेव को संभाला। सामान्य तौर पर किरण सिंहदेव अपने सहृदतया के लिए जाने जाते हैं, लेकिन देवेन्द्र यादव के आचरण के कारण उनका गुस्सा दिमाग से निकलकर शरीर तक पहुंच गया। खैर यह विधानसभा में कोई पहली दफा नहीं हुआ, इसके पूर्व कांग्रेस की सरकार में नगरीय प्रशासन मंत्री रहे शिवकुमार डहरिया एक भाजपा सदस्य की ओर बांहे सकेल के दौड़ पड़े थे, यहां तक कि डहरिया गर्भगृह तक भी पहुंच गये थे। बाद में मामले को शांत कराया गया। कुल मिलाकर विचारों की लड़ाई आचरण में दिखने लगे तो सदन की मर्यादाओं और परंपराओं का चीर हरण होने लगता है, इससे बचना ही बेहतर होता है।
”छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” का नारा मेरे बाप ने दिया
नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने संत पवन दीवान की कविता के साथ अविश्वास प्रस्ताव पर बोलना शुरु किया। महंत ने कहा-
चुप-चुप रहकर सब कुछ सह कर सबका मान बढ़ाते हैं,
बार-बार अपमानित होकर गैरों का गुणगान गाते हैं,
मेहमानों को खूब खिलाकर खुद चुप-चाप सो जाते हैं,
इसीलिए छत्तीसगढिय़ा परबुधिया कहलाते हैं।
चरणदास महंत के द्वारा बोली गई इस लाइन और संत पवन दीवान की इस कविता पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया कहलाते हैं। जिस पर महंत ने सहज भाव से ही लेकिन वित्त मंत्री ओपी चौधरी को धरातल पर उतार दिया। डॉ. चरणदास महंत ने कहा वाह-वाह संत पवन दीवान जी की कविता में भी आपत्ति है? संत पवन दीवान कौन थे? महंत यहीं नहीं रुके उन्होनें वित्त मंत्री ओपी चौधरी को साफ तौर पर कहा कि आपका जन्म कब हुआ है? यह तो मै पता कर लूंगा। और आपको पता भी है, कि नहीं ”छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” का नारा किसने दिया है? महंत ने कहा मेरे बाप ने दिया है। हालांकि यह कोई पहली दफा नहीं है जब मंत्री ओपी चौधरी डॉ. चरण दास महंत के सामने खड़े होकर अपनी भद्द पिटाते हैं। इसके पहले भी महंत और ओपी में तीखी बहस हो चुकी है। लेकिन हर बार महंत वित्त मंत्री ओपी चौधरी को जमीन की याद दिलाते नजर आते हैं। हालांकि ओपी चौधरी के राजनीतिक संरक्षक और उन्हें भाजपा का गमछा पहनवाने वाले नेता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह भी व्यक्तिगत रुप से कक्ष मेें बुलाकार कह चुके हैं कि डॉ. चरणदास महंत बड़े दिल के नेता हैं, सरल हैं, राजनीति का बड़ा अनुभव है, उनसे सीखना चाहिए। लेकिन वित्त मंत्री ओपी चौधरी महंत से भिडऩे का जोखिम उठा ही लेते हैं। अब महंत तो महंत ही हैं, वह ओपी चौधरी को धरातल पर लाने से परहेज नहीं करते।
चन्द्राकर ज्ञानी लेकिन उत्कृष्ट नहीं?
भाजपा विधायक अजय चंन्द्राकर एक ऐसे नेता हैं, जिनकी संसदीय विद्ववता को लेकर हर कोई प्रशंसा करता है। जब राज्य में कांग्रेस की सरकार रही, तब अजय चन्द्राकर अकेले ही भूपेश सरकार पर भारी पड़ते दिखाई देते थे। उस दौर में अजय चंन्द्रकार ने कभी यह ऐहसास नहीं होने दिया कि सदन में विपक्षी सदस्यों की संख्या महज 14 है। खैर आज भी 35 सीटों वाला विपक्ष अजय चंद्राकर को ज्ञानी सदस्य का तमगा दे रखा है। अविश्वास प्रस्ताव में भी सरकार का पक्ष रखने जब अजय चंद्रकार खड़े हुए तो विपक्ष से ज्यादा दोनो पक्षों ने अजय चंद्राकर को सुनने में रुचि दिखाई। संसदीय परंपरा और विधि पर प्वांइट टू प्वाइंट बात करने वाले अजय चंद्राकर से हर एक विधायक सीखना चाहता है, उन्हें सुनना चाहता है। पर यह एक अजीब विडंबना है कि अजय चन्द्राकर ज्ञानी विधायक तो बन गए, लेकिन उत्कृष्ट विधायक नहीं बन पाये? खैर यह विधानसभा का विशेषाधिकार है। समिति इसके लिए मूल्यांकन करती है। जो इसके योग्य होता है उसे उत्कृष्टता के पुरुष्कार से नवाजा जाता है।
भूपेश ने महंत के हाथ से छीना मुद्दा
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने देश के जाने-माने उद्योगपति वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल पर दर्ज एफआईआर और कार्रवाई के संदर्भ सवाल उठाया। महंत की मंशा साफ दिख रही थी, वह सक्ति जिले में हुए वेदांता पॉवर प्लांट में विस्फोट और 25 लोगों की मौत पर सख्त कार्रवाई चाहते थे। महंत के सवाल पर उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने अपने जवाब में बताया कि वेदांता ग्रुप के निदेशक अनिल अग्रवाल समेत 18 लोगों के ऊपर एफआईआर दर्ज की गई है। तब महंत ने पूछा कि उसमें क्या कार्रवाई की गई? जिस पर मंत्री ने बताया कि जांच विवेचना में है। महंत ने कहा विवेचना का क्या मतलब होता है? क्या पुलिस अनिल अग्रवाल से पूछताछ करने के लिए इंग्लैड गई? या फिर उन्हें नोटिस जारी किया गया? या उनका बयान दर्ज किया गया? जिस पर मंत्री ने इनकार किया। खैर इस बीच मंत्री ने बताया कि प्रदेश भर में 248 उद्योगों में घटनांए घटी हैं। तभी भूपेश बघेल ने महंत से मुद्दा छीनकर सवाल को ही पलट दिया। भूपेश बघेल ने कहा कि यदि हादसा में वेदांता ग्रुप के चेयरमेन अनिल अग्रवाल के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, तो इन 248 संस्थानों के डायरेक्टरों पर क्यों नहीं किया गया? क्या वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल पर दबाव बनाया जा रहा है? कि उसकी फैक्ट्री बिक जाए? कुल मिलाकर मंहत का सवाल वेंदाता ग्रुप के चेयरमैन पर कार्रवाई को लेकर था, लेकिन पूर्व सीएम भूपेश बघेल अनिल अग्रवाल का बचाव करते नजर आये।
editor.pioneerraipur@gmail.com