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पैसा ख़ुदा तो नहीं, लेकिन ख़ुदा से कम भी नहीं
किसी ने गलत नहीं कहा है, रुपया ख़ुदा तो नहीं, लेकिन ख़ुदा से कम भी नहीं है। दरअसल वर्तमान वनबल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव इसी माह की 30 तारीख को रिटायर हो रहे हैं। और कहा जा रहा है कि उन्होंने अपने कार्यकाल को बढ़ाने के लिए मुँह माँगी रकम ऑफर कर दी है। खैर सच क्या है? यह तो राव ही जानेंगे। लेकिन इन दिनों चारों ओर यह चर्चा है कि पैसा एक बार फिर ख़ुदा बनने जा रहा है। इसके पहले कांग्रेस की सरकार में भी कई अफसरों को सुपरसीट करके श्रीनिवास राव को हेड ऑफ फारेस्ट की कुर्सी सौंपी गई थी। तब भी यही कहा जा रहा था कि पैसा ख़ुदा से कम नहीं है। खैर श्रीनिवास राव का कार्यकाल बढ़ेगा या नहीं इसका खुलासा जल्द ही होने जा रहा है। दरअसल श्रीनिवास राव के रिटायर होने के बाद वनबल प्रमुख के लिए पहले दावेदार पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ अरुण पांडे बताये जा रहें हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में काले हिरण की संख्या की बढ़ोतरी (छत्तीसगढ़ की वाइल्ड लाइफ) की सराहना की भी थी। कहा तो यह भी जा रहा है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी अरुण पांडे को हेड ऑफ फारेस्ट बनाने के पक्षधर है। एैसे में अरुण पाण्डे हेड ऑफ फारेस्ट बन पायेंगे या फिर पैसा एक बार फिर ख़ुदा बनकर जनता के सामने आएगा? इसका खुलासा निकट भविष्य में होने जा रहा है।
शतरंज का खेल
शतरंज एक एैसा खेल है जिसमें दो खिलाड़ी आमने-सामने बैठकर अपनी रणनीति और बुद्धि का कौशल दिखाते हैं। इस खेल में कब, किसे, कौन मात दे देता है कुछ कहा नहीं जा सकता। दरअसल हम बात कर रहे हैं सीएम सचिवालय की! हाल ही में 43 आईएएस अफसरों के ट्रांसफर किए गये हैं, जिसमें सीएम सचिवालय में भी फेरबदल किया गया है। सीएम सचिवालय में दयानंद गुट के अफसर आईएएस बसवराजू की छुट्टी कर दी गई है। छुट्टी के साथ ही उन्हें नगरीय प्रशासन से हटाकर छोटे विभागों का दायित्व सौंपा गया है। वहीं दूसरी ओर 2005 बैच के च्वाइस को तवज्जो देते हुए आईएएस प्रभात मलिक की सीएम सचिवालय में एंट्री हुई। इसके पहले जशपुर गुट यानि की सीएम के करीबी अफसर डॉ. रवि मित्तल की पीएमओ में पोस्टिंग हो चुकी है। कुल मिलाकर इन दोनों पोस्टिंग से आईपीएस राहुल भगत और दयानंद गुट दोनों कमजोर हुए हैं। इसके साथ ही अफसरों की पोस्टिंग में भी मिली जुली तस्वीर दिखाई दे रही है। कुल मिलाकर सीएम सचिवालय में भी शतरंज की चालें चली जा रहीं है। खेल में कौंन किसे मात दे इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
क्या देखा? क्या पाया?
हाल ही में राज्य सरकार ने आईएएस संबित मिश्रा को बीजापुर कलेक्टर से स्थानांतरित करके रायपुर नगर निगम के कमिश्नर और स्मार्ट सिटी रायपुर लिमिटेड की जिम्मेदारी सौंपी है। संबित मिश्रा उन चुनिंदा अफसरों में से एक है जो जिले में कलेक्टरी करने के बाद रायपुर नगर निगम के कमिश्नर बनाये गये है। इसके पहले सीरियल से कई अफसर रायपुर निगम में कमिश्नरी करने के बाद कलेक्टर बनाये जाते रहे हैं, आईएएस विश्वदीप इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। जबकि विश्वदीप के कार्यकाल में भाजपा नेता, विधायक सभी को निराशा हाथ लगी। निगम क्षेत्र के विकास की गति पिछले दो साल से ठहरी-ठहरी सी दिखी। खैर सरकार की मर्जी जिसको जो चाहे बना दे। लेकिन संबित मिश्रा को रायपुर स्मार्ट सिटी के यथार्थ और वास्तविक स्थित को जानने, देखने और सुनने का अवसर मिल गया है। दरअसल संबित मिश्रा को उनके प्रोबेशन पीरियड में रायपुर स्मार्ट सिटी का भ्रमण कराया गया था। नये-नये आईएएस अफसर संबित तब स्मार्ट सिटी की चका-चौंध देखकर हर्षित थे, लेकिन अब समय बदला उस स्मार्ट सिटी को संबित मिश्रा नजदीक से देखेंगे, जानेगें। जहां भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा, जहां कमीशनखोरी ने पूरे प्रोजेक्ट को डुबाने का काम किया, जहां सरकार की योजनाएँ चहेतों को उपकृत करने का माध्यम मात्र बनकर रह गई है।
अब वास्तविकता से भी वह अवगत होंगे और वास्तव में मूल्यांकन करेंगे पहले क्या देखा था? और धरातल में क्या पाया?
2005 बैच के अफसरों की तैनाती, अरुण साव पर लगाम कसने की तैयारी
बीते दो वर्षों में उप मुख्यमंत्री अरुण साव के विभाग सबसे ज्यादा चर्चे में रहे। सरकारी कार्यों में धांधली और विकास कार्यों की धीमी रफ़्तार ने उप मुख्यमंत्री अरुण साव को भी कहीं न कहीं कठघरे में खड़े करने का काम किया। इसी के चलते उनके विभागों में तेज-तर्रार अफसरों की तैनाती की गई है। साफ-सुथरी छवि के अफसर मुकेश बंसल को पीडब्लूडी का नया सचिव बनाया गया है। मुकेश बंसल सख्त अफसर के रूम में जाने जाते हैं, तो वहीं नगरीय प्रशासन विभाग में भी 2005 बैच की अफसर आर संगीता की तैनाती की गई है। संगीता भी नियमों में काम करने के लिये जानी जातीं हैं। कुल मिलाकर कहीं ना कहीं 2005 बैच अफसरों की तैनाती अरुण साव के विभागों में लगाम कसने के मकसद से की गई है।
महादेव कावरे का रिटायरमेंट और पोस्टिंग, मायने क्या ?
आईएएस महादेव कावरे का इसी माह रिटायरमेंट है। लेकिन रिटाटमेंट के पहले उनकी पोस्टिंग कहीं और कार दी गई है। फिलहाल इसके मायने क्या हैं? इसका खुलासा नहीं हो पाया है। लेकिन यह माना जा रहा है की महादेव कावरे को सरकार संविदा नियुक्ति दे सकती है। दरअसल कावरे को एक सुलझा हुआ अफसर माना जाता है। वह अपने कार्यकाल में विवादित भी नहीं रहे हैं। एैसे में उनके संविदा नियुक्ति के कयास गलत नहीं हैं।
ढाई-ढाई साल का मसला अभी शांत नहीं हुआ
पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने की इच्छा जताई है। कहा जा रहा है कि टीएस सिंहदेव का राजनीतिक सितारा ढाई-ढाई साल में घूमता है। मतलब अभी तक ढाई-ढाई साल का राजनीतिक मसला शांत नहीं हुआ है। हालांकि पूर्व की भूपेश सरकार में सिंहदेव का करियर ढाई-ढाई साल के मसले में उलझकर रह गया। टीएस सिंहदेव ने अब फिर विष्णु सरकार के ढाई साल बीतते-बीतते प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने की इच्छा जताई है। एैसे में सिंहदेव के ग्रह-नक्षत्र राजनीति की क्या दिशा तय करते हैं? फिलहाल इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के केरलम के मुख्यमंत्री बनने के आसार हैं। एैसे में भूपेश बघेल को केंद्रीय टीम में बड़े दायित्व मिलने की संभावना है। अगर एैसा कोई राजनीतिक समीकरण बनता है तो निश्चित ही सिंहदेव के राजनीतिक करियर को एक नई दिशा मिल सकती है।
सत्ता-संगठन में बदलाव जल्द
भाजपा के द्वारा तीन राज्यों में बहुमत हासिल करने के बाद छत्तीसगढ़ में सत्ता, संगठन में बदलाव की खबरें तैरने लगी हैं। कहा जा रहा है कि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को केंद्रीय टीम में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। वास्तव में यदि एैसा हुआ तो छत्तीसगढ़ में सत्ता, संगठन दोनों में फेरबदल की संभावना बढ़ जाएगी। दूसरी ओर भाजपा सरकार में महिलाओं की साझेदारी भी बढ़ा सकती है। विष्णु सरकार में दो महिला मंत्रियों की एंट्री होने की बातें भी इन दिनों चर्चा के केंद्र बने हुये हैं। मतलब अगर एैसा राजनीतिक समीकरण बनता है तो सरकार के चार मंत्री बदले जा सकते हैं। इसमें दो नये और दो पुराने चेहरों को जगह मिलने की संभावना है।
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