नई दिल्ली। फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पोस्ट को कथित तौर पर अस्थायी रूप से हटाए जाने और प्लेटफॉर्म पर डीपफेक व अन्य हानिकारक कंटेंट को लेकर सरकार ने मेटा के सामने कड़े सवाल उठाए हैं। अब सरकार यह भी जांच रही है कि रिकमेंडेशन सिस्टम और पैसे लेकर कंटेंट प्रमोट करने की व्यवस्था मेटा को महज प्लेटफॉर्म की बजाय पब्लिशर की भूमिका में तो नहीं ला रही।
सेफ हार्बर सुरक्षा पर उठे सवाल
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ कानूनी सुरक्षा कुछ शर्तों पर निर्भर करती है। यदि कोई प्लेटफॉर्म खुद यह तय करता है कि किस यूजर को कौन-सा कंटेंट दिखाया जाए और भुगतान लेकर कंटेंट को प्राथमिकता देता है, तो उसकी जिम्मेदारी को लेकर नए कानूनी सवाल खड़े हो सकते हैं।
सरकार यह भी देख रही है कि मेटा ड्यू डिलिजेंस और अन्य निर्धारित नियमों का किस हद तक पालन कर रही है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कंपनी की कानूनी सुरक्षा पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
पीएम मोदी की पोस्ट को लेकर विवाद के बाद बढ़ा तनाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फेसबुक पोस्ट को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित किए जाने के बाद भारत सरकार और मेटा के बीच मामला गरमा गया था। इसके बाद मेटा के ग्लोबल अफेयर्स प्रमुख जोएल कपलान की टीम ने केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और आईटी सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की।
मामले को लेकर संसदीय स्थायी समिति ने भी नाराजगी जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग की ओर से मामले को लेकर माफी मांगी गई है।
डीपफेक और चाइल्ड अब्यूज कंटेंट पर सख्ती
सरकार ने मेटा से पूछा कि रिपोर्ट किए जाने के बाद भी एआई-जनरेटेड हानिकारक कंटेंट और डीपफेक वीडियो बार-बार प्लेटफॉर्म पर कैसे दिखाई देते हैं। साथ ही बिना उचित लेबल के एआई-जनरेटेड वीडियो के प्रसार पर भी सवाल उठाए गए।
मेटा ने इन समस्याओं को गंभीर बताते हुए उन्हें दूर करने के लिए लगातार काम करने का भरोसा दिया है।
भारतीय भाषाओं के लिए बढ़ानी होगी इंसानी निगरानी
सरकार ने मेटा को केवल ऑटोमेटेड सिस्टम या एआई आधारित मॉडरेशन पर निर्भर नहीं रहने की सलाह दी है। उसे ह्यूमन ओवरसाइट बढ़ाने और भारतीय भाषाओं, स्थानीय संस्कृति तथा सामाजिक संदर्भों को बेहतर समझने वाली मॉडरेशन टीमों को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का जोर इस बात पर है कि आपत्तिजनक या खतरनाक कंटेंट की पहचान और कार्रवाई में तकनीक के साथ मानवीय निगरानी भी प्रभावी रूप से मौजूद रहे।