रायपुर। छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप ने वन विभाग में वर्षों से लंबित विभागीय जांच प्रकरणों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी पुराने जांच मामलों का आगामी तीन माह के भीतर अनिवार्य रूप से निपटारा किया जाए, अन्यथा संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाएगी।
लंबित जांचों पर नाराजगी
वन मंत्री ने कहा कि विभागीय जांचों में अनावश्यक देरी प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाती है और इससे कर्मचारियों को लंबे समय तक मानसिक व सेवा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने इसे सुशासन की भावना के खिलाफ बताया।
एक माह में जानकारी संकलन के निर्देश
केदार कश्यप ने आदेश दिया है कि एक माह के भीतर सभी लंबित विभागीय जांच प्रकरणों की विस्तृत जानकारी एकत्र की जाए और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए।
समयबद्ध कार्रवाई पर जोर
उन्होंने कहा कि कई मामलों में जांच प्रस्ताव वर्षों बाद प्रस्तुत किए जाते हैं और कुछ तो कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने के बाद भी लंबित रहते हैं, जो उचित नहीं है। मंत्री ने कहा कि समय पर निर्णय न केवल प्रशासनिक सुधार के लिए जरूरी है, बल्कि इससे पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होती है।
जवाबदेही तय करने के निर्देश
मंत्री ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समयसीमा के बाद यदि प्रकरण लंबित पाए जाते हैं, तो जांचकर्ता और प्रस्तुतकर्ता अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का सुशासन पर फोकस
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन के लिए प्रतिबद्ध है। यह कदम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाया जा सके।