तिल्दा-सिमगा। संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना को लेकर महिलाओं ने बुधवार को कमरछठ यानी हलषष्ठी का व्रत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया। नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं ने विधि-विधान से हलषष्ठी माता की पूजा-अर्चना कर संतान की सुख-समृद्धि की कामना की।
बारिश के बावजूद पर्व को लेकर महिलाओं का उत्साह कम नहीं हुआ। कई पूजा स्थलों पर महिलाएं छाता लेकर पहुंचीं और बारिश की फुहारों के बीच श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना की। मौसम सुहाना होने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी कमरछठ पर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।
सगरी बनाकर की गई पूजा
पूजा स्थलों पर सगरी बनाकर उसमें कांशी के फूल, मिट्टी के बैल, शिवलिंग और गौरी-गणेश की स्थापना कर पूजा की गई। इसके बाद महिलाओं ने हलषष्ठी माता की कथा सुनी और आरती कर अपने बच्चों की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।
पसहर चावल और छह भाजियों का प्रसाद
कमरछठ पर्व पर हल से जुते खेत में पैदा हुए अनाज का सेवन नहीं करने की विशेष परंपरा है। व्रत के बाद महिलाओं ने परंपरानुसार पसहर चावल और छह प्रकार की भाजियों का प्रसाद ग्रहण किया।
बच्चों की पीठ पर लगाई पीली पोती
पूजा-अर्चना के बाद माताओं ने अपने बच्चों की पीठ पर पीली पोती लगाकर तिलक किया। इस दौरान बच्चों के सुखी, स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की गई।
बारिश के बावजूद तिल्दा-सिमगा क्षेत्र में कमरछठ पर्व को लेकर महिलाओं में आस्था और उमंग देखते ही बनी। नगर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक हलषष्ठी का पर्व पारंपरिक रीति-रिवाज और श्रद्धा के साथ मनाया गया।