रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में सरकारी विभागों पर लंबित बिजली बिल को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सदन में जानकारी देते हुए बताया कि जून 2026 तक प्रदेश के शासकीय विभागों, निगमों, मंडलों और आयोगों पर कुल 3035.37 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग का है, जिस पर 1525.18 करोड़ रुपये की राशि लंबित है।
पामगढ़ विधायक शेषराज हरवंश ने विधानसभा में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों पर बकाया बिजली बिल और भुगतान नहीं होने की स्थिति में कनेक्शन काटने की प्रक्रिया की जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने विभागवार आंकड़े प्रस्तुत किए।
नगरीय प्रशासन और पंचायत विभाग पर सबसे ज्यादा बकाया
मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के 19,060 बिजली कनेक्शनों पर 1525.18 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसके बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग दूसरे स्थान पर है, जिस पर 1057.56 करोड़ रुपये लंबित हैं।
इन दोनों विभागों पर ही कुल बकाया राशि का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा दर्ज है।
42 विभागों के 1.57 लाख कनेक्शन प्रभावित
विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के 42 सरकारी विभागों के 1,57,341 बिजली उपभोक्ता कनेक्शनों पर कुल 3035.37 करोड़ रुपये का प्रावधिक बकाया दर्ज है।
अन्य प्रमुख विभागों में:
- लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पर 111.42 करोड़ रुपये
- स्कूल शिक्षा विभाग पर 83.39 करोड़ रुपये
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग पर 32.56 करोड़ रुपये
- वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग पर 40.70 करोड़ रुपये
- महिला एवं बाल विकास विभाग पर 28.57 करोड़ रुपये बकाया हैं।
आवश्यक सेवाओं के कनेक्शन तुरंत नहीं काटे जाते
सरकार ने अपने जवाब में बताया कि जल प्रदाय, अस्पताल, सड़क प्रकाश व्यवस्था और स्कूल शिक्षा जैसी आवश्यक सेवाओं से जुड़े विभागों के बिजली कनेक्शन तुरंत विच्छेद नहीं किए जाते। ऐसे विभागों को पहले बकाया भुगतान के लिए नोटिस जारी किया जाता है, ताकि आम जनता से जुड़ी सेवाएं प्रभावित न हों।
छोटे विभागों पर सबसे कम बकाया
वहीं, कुछ विभागों पर बकाया राशि काफी कम है। नया रायपुर (स्मार्ट सिटी) और रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) पर मात्र 0.01-0.01 करोड़ रुपये का बकाया दर्ज है। इसके अलावा वित्त विभाग पर 0.22 करोड़, योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी विभाग पर 0.23 करोड़ और सुशासन एवं अभिसरण विभाग पर 0.27 करोड़ रुपये लंबित हैं।
सरकार के इस जवाब के बाद अब सरकारी विभागों पर बढ़ते बिजली बिल और भुगतान व्यवस्था को लेकर विधानसभा में आगे भी चर्चा होने की संभावना है।