नई दिल्ली । फेस्टिव सीजन से पहले सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। घरेलू बाजार में मंगलवार को दोनों कीमती धातुओं के वायदा भाव में कमजोरी दर्ज की गई। बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि मौजूदा गिरावट खरीदारी का मौका है या कीमतों में और नरमी आ सकती है।
मंगलवार के शुरुआती कारोबार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर 2026 डिलीवरी वाला सोना 419 रुपये गिरकर 1,46,385 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी के भाव में 1,092 रुपये की गिरावट दर्ज की गई और यह 2,26,350 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स पर सोने का फ्यूचर भाव करीब 0.2 प्रतिशत गिरकर 4,175.10 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। हालांकि, हाजिर सोने की कीमत करीब 0.7 प्रतिशत बढ़कर 4,143.87 डॉलर प्रति औंस रही।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया भी दो महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है।
डॉलर और बॉन्ड यील्ड का असर
सेबी रजिस्टर्ड फर्म इंटेलीसिस वेंचर्स के फाउंडर अमित सुरेश जैन के मुताबिक, डॉलर के साथ 10 साल और 30 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती भी सोने की कीमतों पर दबाव की एक वजह है। अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड के 5.25 प्रतिशत तक पहुंचने का भी बाजार पर असर देखा जा रहा है।
इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें भी निवेशकों के रुख को प्रभावित कर रही हैं। ऊंची ब्याज दरों की संभावना से सोने जैसी गैर-ब्याज वाली परिसंपत्तियों पर दबाव बढ़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमत भी बनी वजह
कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती भी सोने-चांदी के बाजार को प्रभावित कर रही है। क्रूड ऑयल की कीमतें 106 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रही हैं। महंगा कच्चा तेल महंगाई संबंधी चिंताओं को बढ़ा सकता है, जिससे अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों को लेकर बाजार की धारणा प्रभावित होती है।
एक्सपर्ट ने किन स्तरों पर नजर रखने की सलाह दी?
अमित सुरेश जैन के तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक, मौजूदा स्तरों से सोने में 500 से 1,000 रुपये तक की तेजी संभव है। हालांकि, उनके अनुसार 1,54,500 रुपये के स्तर के ऊपर टिकाऊ मजबूती आने के बाद ही तेजी के संकेत मजबूत माने जाएंगे।
वहीं, अगर सोना 1,54,500 रुपये के स्तर को पार नहीं कर पाता है तो कीमतों पर दोबारा दबाव बन सकता है। शुरुआती गिरावट की स्थिति में 1,45,000 रुपये का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर 1,44,000 रुपये और फिर 1,35,000 रुपये के स्तर तक गिरावट की संभावना बताई गई है।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
मौजूदा बाजार में सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए कीमतों के महत्वपूर्ण स्तरों पर नजर रखना जरूरी होगा। विशेषज्ञ की राय के अनुसार, गिरावट की स्थिति में 1,44,000-1,45,000 रुपये के स्तर और तेजी की स्थिति में 1,54,500 रुपये के स्तर पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।
हालांकि, सोना-चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर, ब्याज दरों, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल समेत कई कारकों से प्रभावित होती हैं। इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।