नई दिल्ली | भारत ने रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व मजबूती का प्रदर्शन किया है। इंटीग्रेटेड रक्षा मुख्यालय के अनुसार, नई फोर्स के लिए 50,000 सैन्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जबकि अगले तीन साल में 15 ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों में सिम्युलेटर और वर्चुअल रियलिटी के जरिए रीयल-टाइम बैटल ट्रेनिंग दी जाएगी, और भविष्य में BSF और ITBP जैसी सुरक्षा बलों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
इस नई फोर्स की भूमिका इंटेलिजेंस, सर्विलांस और सटीक प्रहार में दोहरी होगी, और इसे वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड और सेना के ‘आकाशतीर’ सिस्टम का कवच मिलेगा। हर कोर में 8,000 ड्रोन्स तैनात करने और हर फौजी को व्यक्तिगत ड्रोन देने की योजना तैयार है।
आत्मनिर्भर रक्षा और स्वदेशी ईकोसिस्टम
भारत ने अपने रक्षा उत्पादन में जबरदस्त उछाल दर्ज किया है। देश का कुल रक्षा उत्पादन अब 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। विशेष रूप से ब्रह्मोस मिसाइल, जिसमें 2015 में केवल 15% स्वदेशी पुर्जे थे, अब 72% भारतीय बन चुकी है। मिसाइल का सीकर और इंजन अब पूरी तरह से भारत की कंपनियों द्वारा तैयार किया जा रहा है।
साल 2026 में 120 नए डिफेंस स्टार्टअप उभरे हैं, जो 16,000 से अधिक MSME के साथ मिलकर एआई, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में काम कर रहे हैं। रक्षा बजट के 7.85 लाख करोड़ रुपये का 75% हिस्सा भारत में ही खर्च हो रहा है, जिससे रक्षा आयात में 11–15% की गिरावट आई है।
मल्टी-डोमेन युद्ध की तैयारी
भविष्य के युद्ध अब जमीन, हवा, समुद्र और अंतरिक्ष तक फैले होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि अगली बार भारत को स्वार्म ड्रोन और बिना GPS वाले इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ड्रोन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसके जवाब में भारत ने एंटी-ड्रोन क्षमताओं को बढ़ाया और अपने कम्युनिकेशन सिस्टम को इलेक्ट्रॉनिक और साइबर सुरक्षा के लिहाज से मजबूत किया।
ऑपरेशन सिंदूर: 88 घंटे में निर्णायक सफलता
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना और वायुसेना की सटीकता और आक्रामकता ने दुनिया को हैरान कर दिया। 6–7 मई की मध्यरात्रि को 23 मिनट में पाकिस्तान और पीओके में 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया, जिसमें लगभग 100 आतंकियों की मौत हुई।
8 मई को पाकिस्तान ने 1,000 ड्रोन से हमला करने की कोशिश की, लेकिन भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने 98% ड्रोन नष्ट कर दिए। अगले दिन भारत ने सुखोई विमान और ब्रह्मोस मिसाइलों की मदद से पाकिस्तान के 11 एयरबेस नष्ट किए। लगातार प्रहार के बाद पाकिस्तान ने 10 मई की दोपहर में युद्ध रोकने की गुहार लगाई, और भारत ने बिना किसी तीसरे देश की मध्यस्थता के अपनी जीत की पुष्टि की।