बीमा क्लेम खारिज होने पर विवाद: नामिनी ने HDFC Life पर लगाए कारण बदलने के आरोप, मामला उपभोक्ता फोरम पहुंचा

तिल्दा-नेवरा ।  एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस से जुड़ी मृतिका मीरा बघेल की बीमा पॉलिसी का क्लेम खारिज किए जाने का मामला अब उपभोक्ता फोरम तक पहुंच गया है। नामिनी विजय कुमार ने बीमा कंपनी पर क्लेम अस्वीकार करने के लिए अलग-अलग कारण बताए जाने और मामले को कथित रूप से गुमराह करने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

विजय कुमार के अनुसार, मीरा बघेल के नाम पर एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस की बीमा पॉलिसी थी, जिसमें करीब एक लाख रुपये वार्षिक प्रीमियम जमा किया जाता था। नामिनी के मुताबिक पॉलिसी के तहत लगभग 12.40 लाख रुपये बीमा राशि और 8.30 लाख रुपये बोनस से संबंधित दावा किया गया है। मीरा बघेल की मृत्यु के बाद नामिनी ने बीमा राशि के लिए क्लेम प्रस्तुत किया था।

पहले खून की कमी को बताया था आधार

नामिनी का आरोप है कि बीमा कंपनी ने शुरुआत में खून की कमी (एनीमिया) को आधार बनाकर क्लेम खारिज कर दिया। विजय कुमार के मुताबिक, पॉलिसी जारी करने से पहले कंपनी की ओर से मृतिका की आवश्यक स्वास्थ्य जांच कराई गई थी।

उनका दावा है कि मेडिकल जांच में मीरा बघेल का हीमोग्लोबिन 11.4 ग्राम दर्ज किया गया था और अन्य जांच रिपोर्ट सामान्य अथवा नेगेटिव थीं। ऐसे में नामिनी ने सवाल उठाया है कि यदि पॉलिसी जारी करने से पहले स्वास्थ्य जांच में कोई गंभीर समस्या नहीं बताई गई थी, तो मृत्यु के बाद उसी आधार पर क्लेम क्यों अस्वीकार किया गया।

उपभोक्ता फोरम में दायर किया मामला

क्लेम खारिज होने के बाद विजय कुमार ने बीमा कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में मामला दायर किया। उनका आरोप है कि फोरम में मामला पहुंचने के बाद कंपनी की ओर से क्लेम अस्वीकार करने के लिए पहले बताए गए कारण से अलग नया आधार प्रस्तुत किया जा रहा है।

नामिनी के अनुसार, अब कंपनी की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि स्वर्गीय मीरा बघेल ने तीन बार गर्भपात कराया था। इस दावे को लेकर विजय कुमार ने सवाल उठाते हुए संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड और प्रमाण प्रस्तुत किए जाने की मांग की है।

पांच माह के विवाह को लेकर उठाए सवाल

विजय कुमार का कहना है कि मीरा बघेल का विवाह हुए करीब पांच महीने ही हुए थे। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विवाह के बाद की अवधि को आधार माना जाए तो पांच महीने में तीन बार गर्भधारण और गर्भपात का दावा किस आधार पर किया जा रहा है।

नामिनी का आरोप है कि पहले क्लेम खारिज करने के लिए खून की कमी को आधार बनाया गया और बाद में उपभोक्ता फोरम में मामला पहुंचने पर कथित रूप से तीन बार गर्भपात का नया कारण सामने रखा गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

मेडिकल रिकॉर्ड और क्लेम रिजेक्शन की जांच की मांग

नामिनी ने कहा है कि यदि बीमा कंपनी के पास तीन गर्भपात से संबंधित प्रमाणित मेडिकल रिकॉर्ड हैं तो उन्हें मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किया जाना चाहिए। साथ ही पॉलिसी जारी करने से पहले कराई गई मेडिकल जांच और मृत्यु के बाद क्लेम खारिज करने के आधार का भी परीक्षण किया जाना चाहिए।

विजय कुमार ने उपभोक्ता फोरम से पूरे मामले की जांच कर यह निर्धारित करने की मांग की है कि पॉलिसी के तहत बीमा राशि देय है या नहीं। उन्होंने दावा किया है कि यदि क्लेम वैध पाया जाता है तो बीमा राशि के साथ बोनस का भुगतान भी किया जाए।

बीमा कंपनी का पक्ष अभी सामने नहीं आया

मामले में एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। समाचार के लिए कंपनी के संबंधित एजेंट से दूरभाष के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

कंपनी का पक्ष सामने आने के बाद उसे भी समाचार में शामिल किया जाना आवश्यक होगा, ताकि मामले के दोनों पक्षों की स्थिति स्पष्ट हो सके। फिलहाल नामिनी द्वारा लगाए गए आरोप उपभोक्ता फोरम में विचाराधीन मामले का हिस्सा हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

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