किरंदुल।केंद्रीय इस्पात मंत्रालय के अधीन देश की नवरत्न कंपनी एनएमडीसी ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित अपनी बैलाडीला लौह अयस्क खदान परियोजनाओं के आसपास के गांवों में विकास का खाका खींचने की पुख्ता योजना तैयार की है। पहले चरण में किरंदुल और बचेली परियोजनाओं के आसपास की 17 ग्राम पंचायतों में आधारभूत ढांचे के विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाना है। इसका शुभारंभ हाल ही में कुआकोंडा ब्लाॅक स्थित सुदूर अंचल के गांव हिरोली में आयोजित भूमि पूजन कार्यक्रम से हुआ, जहां बस्तर सांसद महेश कश्यप ने एनएमडीसी के अधिशासी निदेशक एवं बैलाडीला किरंदुल परियोजना के प्रमुख रवींद्र नारायण के साथ स्वयं बेलचा चलाकर गांव में कंक्रीट सड़क निर्माण की शुरूआत की।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में मौजूद क्षेत्रीय ग्रामीणों को संबोधित करते हुए सांसद महेश कश्यप ने कहा कि सुदूर गांवों में विकास योजनाओं की आज शुरूआत हुई है। भविष्य में और भी विकास योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा। उन्होंने सीएसआर फंड से शुरू की गई इन विकास योजनाओं के लिए खासतौर पर एनएमडीसी प्रबंधन की सराहना की और कंपनी के सामाजिक सरोकारों के प्रति आभार जताया।
इससे पहले एनएमडीसी बैलाडीला लौह अयस्क खदान किरंदुल परियोजना के अधिशासी निदेशक रवींद्र नारायण ने स्वागत भाषण में एनएमडीसी द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एनएमडीसी हमेशा से अपने परियोजना क्षेत्र एवं उसके आसपास रहने वाले लोगों के विकास के लिए दृढ़ संकल्पित रहा है। अपने नैगम सामाजिक दायित्व के तहत पहले चरण में किरंदुल परियोजना के समीपवर्ती गांव हिरोली, समलवार और चोलनार में विकास की व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत 17 सीसी सड़कें, 15 सोलर हाईमास्ट लाइट्स, 24 सोलर ड्यूल पंपसेट एवं तीन सोलर स्ट्रीट लाइट्स लगाए जाएंगें। इसके बाद अन्य कार्य होंगे।
नारायण ने कहा कि एनएमडीसी द्वारा दंतेवाड़ा जिले में पिछले कई सालों से शिक्षा, स्वास्थ्य व बुनियादी ढांचे के विकास के लिए उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। बालिका शिक्षा सहयोग योजना के तहत वर्ष 2011 से बस्तर की सैकड़ों बेटियों को हैदराबाद स्थित ख्यातिप्राप्त संस्थान से नर्सिंग की पढ़ाई कराने से समूचे बस्तर में पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी दूर हुई है। एनएमडीसी के सहयोग से संचालित छू लो आसमान जैसे शिक्षण संस्थानों से अब बस्तर के युवा डाॅक्टर व इंजीनियर बनकर निकल रहे हैं। ‘लक्ष्य’ जैसी पहल स्थानीय युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की गारंटी बनकर उभरी है। एनएमडीसी द्वारा संचालित शिक्षा सहयोग योजना के जरिये मिल रही छात्रवृत्ति ने हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया है। गांवों में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों के अलावा स्थानीय ट्राइब्स को परियोजना अस्पतालों में निःषुल्क उपचार जैसी योजनाएं एनएमडीसी सीएसआर के तहत कराये जा रहे लोकोपयोगी कार्यों की बानगी भर हैं। भविष्य में भी स्थानीय समुदायों के विकास के लिए हर संभव पहल की जाएगी।
इस अवसर पर बतौर विशिष्ट अतिथि दंतेवाड़ा जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी, उपाध्यक्ष अरविंद कुंजाम, सदस्य सोमारू कड़ती, कुआकोंडा अध्यक्ष अनमोल सुकालू मुड़ामी ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान भारी बारिश के बावजूद हिरोली, चोलनार व समलवार समेत अन्य गांवों के सरपंच व बड़ी संख्या में क्षेत्रीय ग्रामीण कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि दंतेवाड़ा के बैलाडीला क्षेत्र की 17 ग्राम पंचायतों का चयन एनएमडीसी सीएसआर के परिधीय विकास कार्यक्रम के तहत किया गया है। इनमें किरंदुल परियोजना के हिरोली, समलवार व चोलनार के साथ ही बचेली परियोजना से दुगेली, बड़े बचेली, गंजेनार, मसेनार, मोलसनार, नेरली, बड़े कमेली, धुरली, गामावाड़ा, पोरोकमेली, भांसी, बासनपुर और झिरका शामिल हैं। इन पंचायत क्षेत्रों में स्थानीय लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बिटुमिन व कंक्रीट सड़कें, पुल, सोलर लाइट्स, सोलर पंप, वाटर हार्वेस्टिंग जैसी विकास योजनाओं को अमलीजामा पहनाया जाएगा।