रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने के लिए सभी संबंधित विभागों को मिशन मोड में काम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण और नगरीय निकायों को मिलकर प्रभावी रणनीति तैयार करनी होगी।
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में परिवहन विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने ‘जीरो फेटेलिटी’ के लक्ष्य की दिशा में दुर्घटना की रोकथाम से लेकर हादसे के बाद घायल को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तक पूरी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल दुर्घटनाओं की संख्या कम करना नहीं, बल्कि सड़क हादसों में होने वाली प्रत्येक संभावित जनहानि को रोकना होना चाहिए। इसके लिए दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान, सुरक्षित सड़क संरचना, यातायात नियमों का पालन, वाहनों की फिटनेस, प्रशिक्षित चालक और त्वरित चिकित्सा सहायता पर एक साथ काम करना जरूरी है।
ब्लैक स्पॉट पर जल्द होंगे सुधार
मुख्यमंत्री ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों और ब्लैक स्पॉट की पहचान कर वहां सुरक्षात्मक एवं सुधारात्मक कार्य प्राथमिकता से कराने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 23 ब्लैक स्पॉट पर सुधार की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है।
उन्होंने इन कार्यों में तेजी लाने के साथ दुर्घटनाओं के कारणों का नियमित विश्लेषण करने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने को कहा।
साय ने कहा कि दुर्घटना के बाद शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। घायल तक जल्द सहायता और चिकित्सा सुविधा पहुंचने से जीवन बचाने की संभावना बढ़ती है। उन्होंने दुर्घटना की सूचना, एंबुलेंस, अस्पताल और उपचार व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
राहवीर और पीएम-राहत योजना का होगा प्रचार
मुख्यमंत्री ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए पीएम-राहत और राहवीर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा। उन्होंने नागरिकों को दुर्घटना पीड़ितों की सहायता के लिए आगे आने के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि पीएम-राहत योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक 1.50 लाख रुपये तक कैशलेस उपचार की सुविधा का प्रावधान है। वहीं राहवीर योजना दुर्घटना में घायल व्यक्ति की समय पर सहायता करने वाले नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करती है।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का होगा विस्तार
मुख्यमंत्री साय ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना की समीक्षा करते हुए परिवहन सुविधा से वंचित दूरस्थ, ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों को प्राथमिकता से बस नेटवर्क से जोड़ने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि योजना के तहत वर्तमान में 13 जिलों के 106 मार्गों पर 107 बसों का संचालन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने परिवहन सुविधा से वंचित क्षेत्रों का सर्वे कर नए मार्गों की संभावनाओं का परीक्षण करने को कहा।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार तक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम है।
कोंटा-जगरगुंडा में 6 घंटे का सफर अब 45 मिनट
बैठक में कोंटा-जगरगुंडा बस सेवा का उदाहरण भी सामने आया। बताया गया कि बस सेवा शुरू होने से पहले दुर्गम क्षेत्र की यह यात्रा करीब 6 घंटे में पूरी होती थी, जबकि अब लगभग 45 मिनट में सफर पूरा हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी से नागरिकों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान होती है और स्थानीय विकास को भी गति मिलती है।
पर्यटन स्थलों तक बढ़ेगी कनेक्टिविटी
मुख्यमंत्री ने पर्यटन स्थलों तक बेहतर परिवहन सुविधा विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी बेहतर होने से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, खान-पान सहित स्थानीय आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।
वाहनों की फिटनेस जांच में तकनीक का इस्तेमाल
मुख्यमंत्री ने वाहनों की फिटनेस जांच व्यवस्था को अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनाने पर जोर दिया। उन्होंने ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन की व्यवस्था को मजबूत करने तथा 15 वर्ष की अवधि पूरी कर चुके वाहनों के नवीनीकरण और फिटनेस संबंधी नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) लगाने के अभियान में तेजी लाने और लंबित चालानों की रिकवरी बढ़ाने के निर्देश भी दिए।
ई-ट्रैक से ड्राइविंग टेस्ट में बढ़ेगी पारदर्शिता
बैठक में ई-ट्रैक व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। इसके तहत सीसीटीवी कैमरों और सेंसर आधारित प्रणाली से कम्प्यूटराइज्ड ड्राइविंग टेस्ट की व्यवस्था विकसित की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाए, ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता आए और आवश्यक दक्षता रखने वाले व्यक्तियों को ही लाइसेंस मिले।
इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने पर जोर
मुख्यमंत्री ने राज्य की इलेक्ट्रिक वाहन नीति और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने तथा नई तकनीक आधारित परिवहन सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों से कहा कि परिवहन विभाग की सभी व्यवस्थाओं के केंद्र में आम नागरिक की सुरक्षा और सुविधा होनी चाहिए। उन्होंने सुरक्षित सड़कें, फिट वाहन, प्रशिक्षित चालक, आधुनिक तकनीक, बेहतर सार्वजनिक परिवहन और दुर्घटना के बाद त्वरित उपचार को एक साथ मजबूत करने पर जोर दिया।
बैठक में परिवहन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, परिवहन विभाग के सचिव एस. प्रकाश, परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।