नकटी-कुम्हारी में कोयला भट्ठा बंद कराने की मांग, ग्रामीणों ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

तिल्दा-नेवरा। ग्राम पंचायत नकटी-कुम्हारी में संचालित कोयला भट्ठे को बंद कराने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने तहसीलदार तिल्दा को ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कोयला भट्ठे से निकलने वाले धुएं के कारण गांव का पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने तालाब का पानी भी प्रदूषित होने की आशंका जताते हुए प्रशासन से मामले में उचित कार्रवाई की मांग की है।

निजी भूमि पर कोयला भट्ठा संचालित होने का आरोप

ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, गांव निवासी निलेश गोयल की भूमि पर कोयला भट्ठा संचालित किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कोयला बनाने के लिए किसानों के खेतों में लगे पेड़ों की लकड़ियों का उपयोग किया जाता है। इससे पेड़ों की कटाई और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि कोयला निर्माण की प्रक्रिया के दौरान निकलने वाला धुआं आसपास के घरों तक पहुंचता है, जिससे लोगों को परेशानी होती है। इसके अलावा, उन्होंने गांव के तालाब के पानी पर भी प्रदूषण का प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की है।

पंचायत की अनुमति प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल

ज्ञापन में ग्रामीणों ने कोयला भट्ठे के संचालन के लिए ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि ग्रामसभा की बैठक आयोजित किए बिना ही अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया गया। ग्रामीणों ने इस मामले में सरपंच, उपसरपंच, पंचों और पंचायत सचिव की भूमिका की जांच की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

कई विभागों को भेजी ज्ञापन की प्रतिलिपि

ग्रामीणों ने तहसीलदार से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कोयला भट्ठे से पर्यावरण एवं जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करने और नियमों के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

इस संबंध में ज्ञापन की प्रतिलिपि अनुविभागीय अधिकारी तिल्दा, धरसींवा विधायक, थाना प्रभारी खरोरा, पर्यावरण मंत्रालय रायपुर, जनपद पंचायत तिल्दा और वन विभाग तिल्दा को भी भेजी गई है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द जांच कर आवश्यक कदम उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि गांव में स्वच्छ वातावरण बनाए रखने और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए इस मामले का उचित निराकरण जरूरी है। अब ग्रामीणों की शिकायत पर प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है।

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