नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म *‘धुरंधर-2’* को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को निर्देश दिए हैं कि वे फिल्म में दिखाए गए कुछ दृश्यों की राष्ट्रीय सुरक्षा पर संभावित प्रभाव की जांच करें। मामला सशस्त्र सीमा बल (SSB) के हेड कांस्टेबल दीपक कुमार की जनहित याचिका से जुड़ा है।
याचिका में आरोप लगाया गया कि फिल्म में भारतीय सेना की **ऑपरेशनल जानकारी, सैन्य रणनीतियों और संवेदनशील लोकेशनों** को अत्यधिक स्पष्टता से दिखाया गया है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि भले ही फिल्म काल्पनिक हो, लेकिन इन चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने मंत्रालय और CBFC को उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया और याचिकाकर्ता को फैसले की जानकारी देने को कहा।
कोर्ट का दृष्टिकोण:
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि फिल्मों का प्रभाव केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहता। यदि कोई फिल्म संवेदनशील या खतरनाक जानकारी अत्यधिक विस्तार से दिखाती है, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर सवाल उठाता है।
याचिकाकर्ता ने बताया कि उसने पहले ही 23 मार्च 2026 को मंत्रालय और CBFC को विस्तृत प्रतिनिधित्व भेजा था। इसके साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय में भी याचिका दायर की गई है।
धुरंधर-2 की कमाई:
‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर-2’ दोनों ही बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई कर चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार,
* ‘धुरंधर’ ने भारत में ₹840.20 करोड़ और वर्ल्डवाइड ₹1,307.35 करोड़ का कलेक्शन किया।
* ‘धुरंधर 2’ ने भारत में ₹1,146.35 करोड़ का नेट कलेक्शन और ₹1,371.95 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन किया। वर्ल्डवाइड ग्रॉस कमाई लगभग ₹1,798.62 करोड़ बताई जा रही है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर यथाशीघ्र निर्णय लिया जाना चाहिए, और यदि आवश्यक हो तो “सुधारात्मक कदम” उठाए जाएं।