छत्तीसगढ़ के ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय सम्मान, बाल अधिकार आयोग को मिला SKOCH गोल्ड अवार्ड

रायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अभिनव पहल ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। बाल संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने की इस पहल के लिए आयोग को SKOCH गोल्ड अवार्ड से सम्मानित किया गया है।

आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में तैयार किए गए ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम को बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर पहचान मिली है। यह सम्मान SKOCH ग्रुप के चेयरमैन समीर कोचर ने प्रदान किया।

जूरी के सामने किया गया था प्रस्तुतीकरण

पुरस्कार की चयन प्रक्रिया के दौरान आयोग ने जूरी के समक्ष ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। मूल्यांकन के बाद इस पहल को गोल्ड श्रेणी के लिए चुना गया।

इस अवसर पर पर्यावरणविद सुनीता नारायण, पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की पूनम मुटरेजा, भारत सरकार के पूर्व सचिव संजय कुमार और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पूर्व महासचिव भरत लाल सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

एक साल का होगा ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम

‘रक्षक’ का पूरा नाम पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (PGDPCR) है। यह एक वर्षीय, दो सेमेस्टर का पाठ्यक्रम है। इसमें प्रवेश के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक निर्धारित की गई है।

पाठ्यक्रम का उद्देश्य बाल संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित और सक्षम मानव संसाधन तैयार करना है। इसमें केवल सैद्धांतिक पढ़ाई ही नहीं, बल्कि फील्ड वर्क, केस स्टडी और प्रोजेक्ट रिपोर्ट को भी शामिल किया गया है।

बाल संरक्षण संस्थाओं से मिलेगा व्यावहारिक अनुभव

पाठ्यक्रम में शामिल विद्यार्थी बाल कल्याण समितियों, किशोर न्याय बोर्ड, बाल देखरेख संस्थाओं और स्वैच्छिक संगठनों के कार्यों से सीधे जुड़कर व्यावहारिक अनुभव हासिल करेंगे।

इसके पाठ्यक्रम में POCSO अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम, बाल विवाह एवं बाल श्रम प्रतिषेध, दत्तक ग्रहण, शिक्षा का अधिकार और पुनर्वास योजनाओं से जुड़े विषयों को शामिल किया गया है।

युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर

आयोग के अनुसार संबंधित विश्वविद्यालयों के बोर्ड या परिषद की अनुमति मिलने के बाद प्रदेश के विश्वविद्यालयों में ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। इससे युवाओं को बाल संरक्षण, परामर्श और सामाजिक कार्य जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ प्रशिक्षण हासिल करने के साथ रोजगार के नए अवसर भी मिल सकेंगे।

SKOCH गोल्ड अवार्ड मिलने के बाद आयोग की इस पहल को बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में राष्ट्रीय पहचान मिली है।

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