रायपुर । स्वतंत्रता दिवस से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा घोषित वीरता पुरस्कारों में छत्तीसगढ़ पुलिस ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। छत्तीसगढ़ पुलिस के 141 जवानों को वीरता पदक मिलने की जानकारी सामने आई है। यह संख्या देश के किसी भी राज्य पुलिस बल या सुरक्षा संगठन की तुलना में सर्वाधिक बताई जा रही है।
छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों की यह उपलब्धि नक्सल विरोधी अभियानों में उनके साहस और समर्पण को दर्शाती है। लंबे समय से वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों में बस्तर क्षेत्र प्रमुख केंद्र रहा है, जहां पुलिस और सुरक्षा बलों ने माओवादी गतिविधियों के खिलाफ कई महत्वपूर्ण अभियान चलाए हैं।
301 वीरता पदकों में LWE क्षेत्र का बड़ा योगदान
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार इस वर्ष कुल 301 वीरता पदक प्रदान किए गए हैं। इनमें 197 पदक वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में तैनात जवानों को, 51 जम्मू-कश्मीर में तैनात कर्मियों को, 12 पूर्वोत्तर क्षेत्र के जवानों को और 41 पदक अन्य क्षेत्रों में तैनात कर्मियों को मिले हैं।
कुल वीरता पदकों में 272 पुलिस सेवा और 29 अग्निशमन सेवा के कर्मी शामिल हैं। इन पदकों के जरिए कठिन परिस्थितियों में असाधारण साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बहादुरी का प्रदर्शन करने वाले कर्मियों को सम्मानित किया गया है।
1,057 कर्मियों को वीरता और सेवा पदक
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पुलिस, अग्निशमन सेवा, होम गार्ड, नागरिक सुरक्षा और सुधार सेवाओं के कुल 1,057 कर्मियों को वीरता एवं सेवा पदकों के लिए चुना गया है।
इनमें विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक (PSM) भी शामिल हैं। कुल 92 PSM में 83 पुलिसकर्मी, 4 अग्निशमन सेवा कर्मी, 3 नागरिक सुरक्षा एवं होम गार्ड कर्मी और 2 सुधार सेवा कर्मी शामिल हैं।
इसके अलावा 664 कर्मियों को सराहनीय सेवा पदक (MSM) प्रदान किए गए हैं। इनमें 606 पुलिस सेवा, 28 फायर सर्विस, 18 सिविल डिफेंस एवं होम गार्ड तथा 12 सुधार सेवा के कर्मी शामिल हैं।
नक्सल विरोधी लड़ाई में छत्तीसगढ़ की अहम भूमिका
वीरता पदकों की बड़ी संख्या छत्तीसगढ़ के नक्सल विरोधी अभियानों में पुलिस बल की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है। बस्तर सहित नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच जवानों ने अभियान चलाते हुए अदम्य साहस का परिचय दिया है।
इस वर्ष बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ पुलिस जवानों को मिले वीरता पदक उनके साहस, कर्तव्य के प्रति समर्पण और नक्सल विरोधी अभियानों में योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान के रूप में देखे जा रहे हैं।