इस्लामाबाद । चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के प्रमुख हिस्से के रूप में विकसित किया जा रहा ग्वादर पोर्ट अपेक्षित आर्थिक और रणनीतिक परिणाम हासिल करने में कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। चीन की योजना पाकिस्तान के रास्ते अपने पश्चिमी प्रांत शिनजियांग को अरब सागर से जोड़ने और व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार करने की थी। हालांकि, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, सुरक्षा संबंधी जोखिम, सीमित व्यापारिक गतिविधियों और स्थानीय असंतोष ने इस परियोजना की राह मुश्किल कर दी है।
ग्वादर पोर्ट को चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) और CPEC का महत्वपूर्ण समुद्री केंद्र माना जाता है। इसके जरिए चीन हिंद महासागर क्षेत्र तक अपनी पहुंच मजबूत करना और मलक्का जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करना चाहता है। लेकिन एक दशक से अधिक समय बाद भी ग्वादर में उस स्तर की वाणिज्यिक गतिविधियां विकसित नहीं हो सकी हैं, जिसकी उम्मीद परियोजना की शुरुआत के समय की गई थी।
कठिन भौगोलिक मार्ग बनी बड़ी चुनौती
चीन के शिनजियांग से ग्वादर तक सामान पहुंचाने के लिए पाकिस्तान के काराकोरम क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ता है। इस मार्ग में 4,600 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाके भी आते हैं, जहां भूस्खलन, हिमस्खलन और खराब मौसम जैसी चुनौतियां बनी रहती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मार्ग बड़े पैमाने पर कंटेनर यातायात के लिए समुद्री परिवहन का प्रभावी विकल्प बनने में कठिनाइयों का सामना करता है।
सुरक्षा और स्थानीय असंतोष भी चिंता का विषय
ग्वादर और बलूचिस्तान क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां भी CPEC परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई हैं। इसके अलावा स्थानीय लोगों की ओर से पानी, बिजली और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं।
स्थानीय मछुआरों ने भी डीप-सी ट्रॉलिंग और सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण अपनी आजीविका प्रभावित होने की शिकायत की है। ग्वादर को आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्र के विकास के केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया गया था, लेकिन स्थानीय स्तर पर परियोजना से अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिलने की नाराजगी भी सामने आई है।
CPEC की अन्य परियोजनाओं पर भी वित्तीय दबाव
ग्वादर से जुड़ी चुनौतियां CPEC की व्यापक वित्तीय और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के संदर्भ में भी देखी जा रही हैं। 2025 में CPEC के तहत प्रस्तावित मेन लाइन-1 रेलवे अपग्रेड के लिए चीन की फंडिंग रुकने के बाद पाकिस्तान को कराची-रोहरी रेल खंड के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक से वित्तीय सहायता लेने की दिशा में आगे बढ़ना पड़ा।
जनवरी 2025 में ग्वादर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस की पहली उड़ान के पहुंचने को दोनों देशों ने महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया था। इसके बावजूद, बंदरगाह और आसपास के आर्थिक क्षेत्र में पर्याप्त औद्योगिक एवं व्यापारिक गतिविधियां विकसित करना अभी भी चुनौती बना हुआ है।
चीनी कंपनी के बंद होने से भी उठे सवाल
ग्वादर फ्री जोन में काम कर रही चीनी कंपनी हैंगेंग ट्रेड कंपनी द्वारा अपनी फैक्ट्री बंद करने और कर्मचारियों को हटाने की खबर ने भी क्षेत्र में कारोबारी माहौल को लेकर सवाल खड़े किए हैं। कंपनी ने कथित तौर पर वित्तीय नुकसान और अनुकूल कारोबारी परिस्थितियों की कमी को इसके कारणों में शामिल किया।
ग्वादर पोर्ट चीन के लिए केवल एक बंदरगाह परियोजना नहीं, बल्कि हिंद महासागर तक रणनीतिक पहुंच और CPEC के व्यापक विजन का हिस्सा है। हालांकि, वर्तमान परिस्थितियां बताती हैं कि परियोजना को आर्थिक व्यवहार्यता, सुरक्षा, बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय भागीदारी से जुड़ी कई चुनौतियों का समाधान करना होगा।