नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों से कथित छेड़छाड़ मामले में बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें और WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को मामले में आरोपमुक्त कर दिया है।
अदालत के इस फैसले के बाद दोनों के खिलाफ इस मामले में आगे आपराधिक मुकदमा नहीं चलेगा। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने छह महिला पहलवानों की शिकायत से जुड़े मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया।
कोर्ट के फैसले के बाद बृजभूषण ने दी प्रतिक्रिया
फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि कोर्ट ने उन्हें बाइज्जत बरी किया है। उन्होंने कहा, “मैंने उस दिन कहा था कि मैं खुद फांसी पर लटक जाऊंगा, लेकिन वह नौबत नहीं आई। आज मैं कोर्ट से जा रहा हूं।”
हालांकि, जब उनसे आरोप लगाने वाले पहलवानों और कथित राजनीतिक साजिश को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
क्या था मामला?
महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ और धमकी देने जैसे आरोप लगाए थे। दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ IPC की धाराओं 354, 354A, 354D और 506 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था।
इस मामले ने वर्ष 2023 में उस समय बड़ा राजनीतिक और खेल जगत का मुद्दा बना, जब कई प्रमुख पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया और निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
जंतर-मंतर आंदोलन से चर्चा में आया मामला
बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आंदोलन में विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया और साक्षी मलिक जैसे पहलवान शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने मामले में कार्रवाई और जवाबदेही की मांग उठाई थी।
राजनीतिक असर भी पड़ा
मामले के बाद भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बृजभूषण शरण सिंह को टिकट नहीं दिया था। उनकी जगह पार्टी ने कैसरगंज लोकसभा सीट से उनके बेटे को उम्मीदवार बनाया था।
अदालत के इस फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी कानूनी राहत मिली है।