फालता में BJP की बंपर जीत से TMC में हलचल, अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल |  पश्चिम बंगाल की फालता विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान में भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है. बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने माकपा उम्मीदवार शंभु नाथ कुर्मी को 1,09,021 वोटों के भारी अंतर से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की. वहीं तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान चौथे स्थान पर रहे, जिसके बाद सत्तारूढ़ दल के भीतर हलचल तेज हो गई है.

यह सीट अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर के अंतर्गत आती है और लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है. ऐसे में बीजेपी की इस जीत को बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है.

नतीजों के बाद अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि चुनाव में कई “विसंगतियां” देखने को मिलीं. अभिषेक ने सवाल उठाते हुए कहा कि पहले जहां दोपहर 3 बजे तक केवल 2 से 4 राउंड की मतगणना पूरी होती थी, वहीं इस बार 3 बजे तक 21 राउंड की गिनती पूरी हो गई.

उन्होंने आरोप लगाया कि फालता से टीएमसी के 1000 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को बाहर कर दिया गया, जबकि चुनाव आयोग “आंखों पर पट्टी बांधे” बैठा रहा. अभिषेक ने दावा किया कि दिनदहाड़े पार्टी कार्यालयों पर हमले हुए और आचार संहिता का खुलेआम उल्लंघन किया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी दलों के पोलिंग एजेंटों को बूथों से हटाया गया.

फालता सीट पर टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान, जिन्हें इलाके में पार्टी का प्रभावशाली चेहरा माना जाता था, मतदान से 48 घंटे पहले चुनाव लड़ने से पीछे हट गए थे. हालांकि समय कम होने की वजह से उनका नाम ईवीएम में बना रहा. राजनीतिक हलकों में इसे टीएमसी के लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका माना जा रहा है.

बताया जा रहा है कि डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र 2009 से टीएमसी का मजबूत किला रहा है और यहां अभिषेक बनर्जी की राजनीतिक पकड़ मानी जाती रही है. ऐसे में फालता में बीजेपी की जीत को विपक्ष बंगाल की राजनीति में “टर्निंग पॉइंट” के रूप में पेश कर रहा है.

फालता विधानसभा सीट पहले भी विवादों में रही है. चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल को यहां पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया था. कई बूथों पर ईवीएम से छेड़छाड़, चुनाव चिह्न ढकने और बूथ कैप्चरिंग जैसे आरोप सामने आए थे. हालांकि दोबारा मतदान के दौरान किसी बड़े तनाव की खबर नहीं मिली और शाम 5 बजे तक करीब 86 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया.

बीजेपी और वाम दल लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि स्थानीय प्रशासन विपक्षी कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाता है. वहीं बीजेपी ने डायमंड हार्बर क्षेत्र को मानव तस्करी, घुसपैठ और नशीले पदार्थों के ट्रांजिट नेटवर्क से जोड़ते हुए राज्य सरकार पर भी निशाना साधा है.

फालता के नतीजों ने अब पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां बीजेपी इसे जनता के मूड में बदलाव बता रही है, जबकि टीएमसी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है.

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