नई दिल्ली | दिल्ली हाईकोर्ट ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से जुड़ी कथित टिप्पणियों और सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर चल रहे आपराधिक अवमानना मामले में अहम आदेश जारी किया है। अदालत ने मामले की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता राजदीपा बेहूरा को एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त किया है।
मामले की सुनवाई जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंद्र दुग्गल की डिवीजन बेंच कर रही है। अदालत ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निष्पक्ष कानूनी सहायता जरूरी है, ताकि सभी पक्षों के तर्क संतुलित तरीके से सामने आ सकें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राजदीपा बेहूरा अरविंद केजरीवाल की ओर से दलीलें पेश करेंगी।
यह मामला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से संबंधित कथित टिप्पणियों और सोशल मीडिया सामग्री से जुड़ा है, जिस पर अदालत की गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाए गए हैं। इससे पहले कोर्ट अरविंद केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर चुका है।
दो मामलों की एक साथ होगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले से जुड़े दोनों प्रकरणों की सुनवाई एक साथ की जाएगी, ताकि प्रक्रिया में एकरूपता बनी रहे। पहला मामला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा लिए गए स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) से जुड़ा है, जिसमें 14 मई को अरविंद केजरीवाल और अन्य आम आदमी पार्टी नेताओं के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की गई थी।
दूसरा मामला अधिवक्ता अशोक चैतन्य की याचिका से संबंधित है, जिसमें अरविंद केजरीवाल, सौरभ भारद्वाज, गोपाल राय और पत्रकार सौरव दास को पक्षकार बनाया गया है। अदालत ने गोपाल राय और सौरव दास को भी नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि याचिका में शामिल दस्तावेजों और अन्य सामग्री की प्रतियां अरविंद केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज को उपलब्ध कराई जाएं, ताकि सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिल सके।