कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी संगठनात्मक विवाद अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर पार्टी के बागी गुट के नेता रितब्रता बनर्जी को जवाब दाखिल करने के लिए और समय नहीं देने की मांग की है।
ममता बनर्जी ने अपने पत्र में कहा है कि तय समय सीमा समाप्त होने के बाद भी रितब्रता बनर्जी गुट की ओर से अब तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है। उन्होंने आयोग से आग्रह किया है कि उनके पक्ष की ओर से दिए गए जवाब पर जल्द विचार किया जाए।
टीएमसी के असली-नकली दावे पर विवाद
दरअसल, टीएमसी में वर्चस्व को लेकर दो गुटों के बीच खींचतान चल रही है। रितब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने खुद को असली तृणमूल कांग्रेस (AITC) बताते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया था।
इस गुट ने दावा किया था कि 22 जून को आयोजित विशेष अधिवेशन के बाद संगठन में किए गए बदलावों की जानकारी चुनाव आयोग को दी गई थी और उन्हें मान्यता देने का अनुरोध किया गया था।
चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से मांगा था जवाब
मामले पर चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और रितब्रता बनर्जी दोनों गुटों को नोटिस जारी कर अपना-अपना पक्ष रखने को कहा था। आयोग ने दोनों पक्षों से यह भी कहा था कि वे अपने जवाब की जानकारी एक-दूसरे को उपलब्ध कराएं।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने 6 जुलाई 2026 को अपना जवाब दाखिल कर दिया था, जबकि रितब्रता बनर्जी गुट को 10 जुलाई 2026 शाम 5:30 बजे तक जवाब देने का समय दिया गया था।
ममता ने लगाया देरी का आरोप
चुनाव आयोग को भेजे पत्र में ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि समय सीमा खत्म होने के करीब 48 घंटे बाद भी रितब्रता बनर्जी गुट की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है।
उन्होंने कहा कि देरी से दूसरे पक्ष को अतिरिक्त अवसर मिल रहा है। ममता ने आयोग से अपील की कि उनके द्वारा दाखिल जवाब पर जल्द निर्णय लिया जाए और रितब्रता बनर्जी गुट को आगे कोई अतिरिक्त समय न दिया जाए।
बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
टीएमसी के भीतर चल रहा यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब पार्टी हालिया राजनीतिक चुनौतियों से गुजर रही है। चुनाव आयोग में दोनों गुटों की दावेदारी के बाद अब आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।