भानुप्रतापपुर | छत्तीसगढ़ के बस्तर में आज दो तस्वीरें सामने आईं, जो क्षेत्र के बदलते दौर की कहानी बयां कर रही हैं। एक तस्वीर विकास की है और दूसरी बदलाव और विश्वास की।
कांकेर जिले में स्थित रावघाट रेल परियोजना के अंतिम चरण का आज सफल ट्रायल संपन्न हुआ। ताडोकी से रावघाट तक पहली बार ट्रेन चली, जो इस परियोजना का अंतिम पड़ाव है। करीब 21 साल पहले 2007 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना को नक्सलवाद जैसी चुनौतियों के बीच पूरा करने में लंबा समय लगा। इस दौरान कई सुरक्षाबल, कर्मचारी और स्थानीय लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
दूसरी ओर, भानुप्रतापपुर से मिली तस्वीर में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट चुके पूर्व नक्सली पहली बार रेल में सफर करते नजर आए। जिला पुलिस ने उन्हें रेल यात्रा कराई, और सफर के दौरान उनकी खुशी, उत्साह और रोमांच साफ दिखाई दिया। कभी रेल परियोजनाओं का विरोध करने वाले नक्सली अब विकास की इस नई पटरी का हिस्सा बन गए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये दोनों घटनाएं सिर्फ खबर नहीं बल्कि बदलते बस्तर की नई कहानी हैं—जहां 21 साल का संघर्ष पूरी तरह सफल हुआ और हिंसा की जगह अब विकास की रफ्तार सुनाई देने लगी है।