नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए 2003 बैच की वरिष्ठ IAS अधिकारी पद्मा जायसवाल को उनकी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की सिफारिश के बाद भारत के राष्ट्रपति ने इस आदेश पर अंतिम मुहर लगा दी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला करीब 16-17 साल पुराना है। साल 2007-08 में जब पद्मा जायसवाल अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में उपायुक्त के पद पर तैनात थीं, तब उन पर सरकारी धन के दुरुपयोग और पद के गलत इस्तेमाल के आरोप लगे। स्थानीय निवासियों की शिकायत के बाद फरवरी 2008 में उन्हें निलंबित किया गया था। हालांकि 2010 में उनका निलंबन वापस ले लिया गया था, लेकिन जांच पूरी होने के बाद आखिरकार उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।
पद्मा जायसवाल AGMUT (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) कैडर की अधिकारी थीं। अपने 20 साल से अधिक के करियर में उन्होंने दिल्ली, गोवा, पुडुचेरी और अरुणाचल प्रदेश में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। हालांकि भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूतों ने उनके शानदार करियर का अंत कर दिया।
शैक्षणिक रूप से पद्मा जायसवाल काफी प्रतिभाशाली मानी जाती हैं। उन्होंने St. Xavier’s School से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, Panjab University के बिजनेस स्कूल से MBA किया, और Institute of Company Secretaries of India (ICSI) से प्रमाणित कंपनी सेक्रेटरी की योग्यता हासिल की। इसके अलावा वे UGC रिसर्च फेलो के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, इंटरनेशनल अफेयर्स तथा फाइनेंशियल मैनेजमेंट में अध्ययन किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी सेवारत IAS अधिकारी की बर्खास्तगी भारतीय प्रशासनिक सेवा में अत्यंत दुर्लभ और सख्त कदम माना जाता है। इस मामले में सरकार का उद्देश्य साफ है: भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और प्रशासनिक अनुशासन को बनाए रखना।