कोयंबटूर। NEET-UG री-एग्जाम से पहले छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव के बीच तमिलनाडु के कोयंबटूर से एक दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां 19 वर्षीय NEET अभ्यर्थी अनुनकीर्तन ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। छात्रा की मौत ने एक बार फिर मेडिकल प्रवेश परीक्षा और छात्रों के मानसिक तनाव को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के मुताबिक, अनुनकीर्तन ने बुधवार सुबह जहर खाकर अपनी जान दे दी। वह पहले भी दो बार NEET परीक्षा दे चुकी थी और इस बार दोबारा परीक्षा की तैयारी कर रही थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि परीक्षा रद्द होने और फिर से परीक्षा देने की स्थिति को लेकर वह काफी परेशान थी।
आखिरी मैसेज में छलका दर्द
पुलिस के अनुसार, छात्रा ने मौत से पहले अपने चाचा और रिश्तेदारों को व्हाट्सएप मैसेज भेजा था। इसमें उसने लिखा कि उसने NEET परीक्षा दी थी और मेडिकल कॉलेज में दाखिले का इंतजार कर रही थी, लेकिन परीक्षा रद्द हो गई। उसने दोबारा परीक्षा देने को लेकर डर और पिता के खर्च को लेकर चिंता जताई थी।
अहमदाबाद में भी छात्र ने दी जान
NEET छात्रों से जुड़े आत्महत्या के मामलों के बीच अहमदाबाद के न्यू रानीप इलाके में भी एक 17 वर्षीय छात्र ने छठी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस जांच में पता चला कि छात्र NEET की तैयारी कर रहा था। हालांकि आत्महत्या के कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ है।
पिछले कुछ दिनों में NEET अभ्यर्थियों की आत्महत्या के कई मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं के बाद छात्रों पर परीक्षा के दबाव और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
तमिलनाडु में विरोध तेज
घटना के बाद कोयंबटूर में कई संगठनों और छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने NEET परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे खत्म करने की मांग की। डीएमके ने भी NEET के विरोध में राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है।
तमिलनाडु लंबे समय से NEET का विरोध करता रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि यह परीक्षा ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि महंगे कोचिंग संस्थानों तक पहुंच रखने वाले छात्रों को अधिक फायदा मिलता है।
राज्य में पहले मेडिकल कॉलेजों में दाखिला 12वीं के अंकों के आधार पर होता था। तमिलनाडु सरकार NEET से छूट की मांग को लेकर कई बार केंद्र के सामने अपनी बात रख चुकी है।