नई दिल्ली | भारत की ऐतिहासिक विरासत को बचाने के लिए एक आयरिश नागरिक की अनोखी पहल की बिजनेसमैन आनंद महिंद्रा ने जमकर सराहना की है। 80 वर्षीय कैरन रॉन्सले, जिन्हें जोधपुर में प्यार से ‘पागल साब’ कहा जाता है, पिछले कई वर्षों से शहर की उपेक्षित बावड़ियों और पारंपरिक जल संरचनाओं को साफ और संरक्षित करने का काम कर रहे हैं।
कैरन रॉन्सले एक दशक से अधिक समय पहले जोधपुर घूमने आए थे, लेकिन यहां की प्राचीन बावड़ियों और उनकी खराब स्थिति ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने इन्हें संवारने का जिम्मा उठा लिया। उन्होंने अपने हाथों से कई पुरानी बावड़ियों से कचरा हटाया और उन्हें दोबारा लोगों के बीच पहचान दिलाने का प्रयास किया।
विरासत बचाने में जुटे ‘पागल साब’
रॉन्सले ने जोधपुर की कई ऐतिहासिक जल संरचनाओं, जिनमें रामबौरी और गुलाब सागर जैसी बावड़ियां शामिल हैं, पर काम किया। उनका उद्देश्य केवल सफाई करना नहीं था, बल्कि लोगों को इन पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों के महत्व से जोड़ना भी था।
उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार जोधपुर की बावड़ियों को देखा तो उनकी सुंदर वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व ने उन्हें आकर्षित किया, लेकिन उनकी खराब स्थिति देखकर उन्हें काफी दुख हुआ। इसके बाद उन्होंने इन्हें फिर से जीवंत करने का संकल्प लिया।
आनंद महिंद्रा ने की जमकर तारीफ
आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया पर कैरन रॉन्सले की कहानी साझा करते हुए उनके समर्पण को सलाम किया। उन्होंने कहा कि भारत की विरासत को बचाने के लिए किसी व्यक्ति का विशेषज्ञ होना या किसी खास स्थान से जुड़ा होना जरूरी नहीं है, बल्कि समर्पण और जुनून जरूरी है।
महिंद्रा ने ‘पागल साब’ के भारत की विरासत के प्रति प्रेम और निस्वार्थ प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनका काम लगातार जारी रहना चाहिए।
बावड़ियां सिर्फ स्मारक नहीं, जल संरक्षण की धरोहर
राजस्थान की बावड़ियां सदियों से जल संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम रही हैं। ये केवल पानी जमा करने की संरचनाएं नहीं थीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र भी हुआ करती थीं।
समय के साथ आधुनिक जल व्यवस्था आने के बाद कई बावड़ियां उपेक्षित हो गईं और कुछ कचरा डालने की जगह बन गईं। कैरन रॉन्सले जैसे लोगों के प्रयासों से इन ऐतिहासिक धरोहरों को फिर से पहचान मिल रही है।
आनंद महिंद्रा की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों ने ‘पागल साब’ के प्रयासों की सराहना की और कहा कि विरासत की रक्षा के लिए उनका समर्पण प्रेरणादायक है।