रायपुर । उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य में एनालॉग पनीर और अन्य डेयरी एनालॉग उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने सभी डेयरी उत्पाद निर्माताओं, खाद्य कारोबार संचालकों, थोक और फुटकर विक्रेताओं को शासन के निर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की है।
दूध के विकल्प से बने उत्पादों पर कार्रवाई
विभाग के अनुसार, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत यह निर्णय लिया गया है। जांच, प्रयोगशाला परीक्षण और जोखिम मूल्यांकन में सामने आया कि कुछ उत्पादों में वास्तविक दूध का उपयोग नहीं किया जा रहा था, फिर भी उन्हें पनीर, क्रीम, मक्खन या अन्य दुग्ध उत्पादों के रूप में बेचा जा रहा था।
ऐसे उत्पादों में दूध की जगह वनस्पति वसा, वनस्पति तेल या अन्य गैर-दुग्ध सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। इससे उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
इन उत्पादों पर नहीं लगेगा प्रतिबंध
विभाग ने स्पष्ट किया है कि फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे वे उत्पाद, जिनके लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के मानक निर्धारित हैं और जिनकी सही लेबलिंग की जाती है, इस प्रतिबंध के दायरे में नहीं आएंगे।
एक साल तक लागू रहेगा प्रतिबंध
सरकार द्वारा लगाया गया यह प्रतिबंध राजपत्र में अधिसूचना जारी होने की तारीख से एक वर्ष तक या FSSAI द्वारा अंतिम नियम जारी होने तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगा।
इस दौरान खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से लगातार निरीक्षण और निगरानी की जाएगी। प्रतिबंधित उत्पादों के निर्माण, भंडारण या बिक्री की स्थिति में संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने कहा है कि यह कदम खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और आम नागरिकों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।