मणिपुर हिंसा पर खरगे ने सरकार से पूछे तीन सवाल, चार नागरिकों की हत्या पर जताया दुख

नई दिल्ली । मणिपुर में ताजा हिंसा के दौरान चार नागरिकों की हत्या के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से राज्य में शांति बहाली और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर जवाब मांगा है। खरगे ने आरोप लगाया कि मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद भी राज्य में स्थायी शांति स्थापित नहीं हो सकी है।

खरगे ने कहा कि मई 2023 से अब तक 300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 24,530 लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने विस्थापित परिवारों, महिलाओं और बच्चों की स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रभावित लोगों की सुरक्षित वापसी और पुनर्वास के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह से पूछे तीन सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष ने मणिपुर की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख सवाल रखे हैं।

1. शांति समिति का क्या हुआ?

खरगे ने जून 2023 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा गठित शांति समिति की स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि राज्य में शांति बहाल करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और लगातार बनी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अब तक कौन से ठोस कदम उठाए गए हैं।

2. विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए क्या कार्रवाई हुई?

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर हुई कार्रवाई का ब्योरा मांगा। खरगे ने यह भी सवाल उठाया कि हजारों लोग अब भी अपने घरों से दूर क्यों रह रहे हैं और राहत शिविरों में रह रहे परिवारों की सुरक्षा, गरिमा तथा पुनर्वास के लिए क्या व्यवस्था की गई है। उन्होंने राहत शिविरों में 31 अप्राकृतिक मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का भी उल्लेख किया।

3. हिंसा और मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा?

खरगे ने पूछा कि 300 से अधिक मौतों, राष्ट्रपति शासन और मुख्यमंत्री बदलने के बावजूद यदि हिंसा जारी है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की।

भाजपा सरकार की भूमिका पर उठाए सवाल

खरगे ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति शासन लागू करने, मुख्यमंत्री बदलने और बाद में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार की वापसी के बावजूद मणिपुर में स्थायी शांति स्थापित नहीं हो सकी है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के हिंसा शुरू होने के बाद लंबे समय तक मणिपुर का दौरा नहीं करने को लेकर भी आलोचना की।

कांग्रेस अध्यक्ष के ये आरोप राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। राज्य में सुरक्षा व्यवस्था, शांति बहाली और पुनर्वास को लेकर सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का समग्र आकलन करने के लिए आधिकारिक जवाब और संबंधित प्रशासनिक आंकड़े भी महत्वपूर्ण होंगे।

मई 2023 से जारी है जातीय संघर्ष

मणिपुर में मई 2023 में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष शुरू हुआ था। इस हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और हजारों परिवारों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी। ताजा घटनाओं ने राज्य में सुरक्षा और सामान्य जनजीवन की बहाली को लेकर चिंताएं फिर बढ़ा दी हैं।

खरगे ने कहा कि मणिपुर के लोगों को न्याय, सम्मान, संवैधानिक अधिकार और स्थायी शांति मिलनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, हिंसा रोकने और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की।

फिलहाल, मणिपुर में हिंसा पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा, राहत शिविरों में बेहतर सुविधाएं और स्थायी शांति की बहाली प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

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