नई दिल्ली । अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की इकाई कच्छ कॉपर लिमिटेड गुजरात के मुंद्रा स्थित अपनी तांबा शोधन इकाई में 115 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। कंपनी का उद्देश्य इस पहल के माध्यम से कार्बन उत्सर्जन कम करना, जल संरक्षण को बढ़ावा देना और संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग सुनिश्चित करना है।
कंपनी ने अपनी पहली सतत विकास रिपोर्ट में इस योजना का उल्लेख किया है। इसके तहत पर्यावरण, सामाजिक जिम्मेदारी और सुशासन (ईएसजी) से जुड़े पहलुओं को परिचालन का अभिन्न हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है।
तांबा उत्पादन क्षमता दोगुनी करने की योजना
कच्छ कॉपर की मुंद्रा स्थित तांबा गलाने वाली इकाई की मौजूदा उत्पादन क्षमता सालाना पांच लाख टन है। कंपनी इसे बढ़ाकर 10 लाख टन सालाना करने की योजना पर काम कर रही है।
कंपनी के अनुसार, विस्तार पूरा होने के बाद यह एक ही स्थान पर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी तांबा गलाने वाली इकाई बन सकती है। इस विस्तार से कंपनी की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
कार्बन उत्सर्जन घटाने पर रहेगा फोकस
कंपनी ने अपनी सतत विकास रिपोर्ट में कहा है कि 115 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा को परिचालन में शामिल करना उसकी पर्यावरणीय रणनीति का प्रमुख हिस्सा है। इस कदम का उद्देश्य परिचालन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना और दीर्घकालिक स्तर पर पर्यावरणीय प्रभाव को सीमित करना है।
इसके साथ ही कंपनी जल संरक्षण और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल औद्योगिक गतिविधियों को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बढ़ती मांग से तांबा उद्योग को मिल रहा प्रोत्साहन
ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव, इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार, बिजली पारेषण नेटवर्क का विकास और औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि से तांबे की मांग बढ़ रही है। तांबा बिजली के बेहतर सुचालक होने के कारण नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, इलेक्ट्रिक वाहनों और विद्युत अवसंरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ऐसे में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग की योजना कच्छ कॉपर के लिए औद्योगिक विस्तार और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास है।
कंपनी की प्रस्तावित पहल से ऊर्जा उपयोग की दक्षता बढ़ाने और उत्सर्जन में कमी लाने के प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि, योजना के वास्तविक पर्यावरणीय परिणाम इसके क्रियान्वयन और ऊर्जा स्रोतों के प्रभावी उपयोग पर निर्भर करेंगे।