सरकेगुड़ा के बालक आश्रम में बदहाली के आरोप, पतली दाल और फटे गद्दों के बीच रहने को मजबूर बच्चे

बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के सरकेगुड़ा स्थित संयुक्त बालक आश्रम में बुनियादी सुविधाओं की कमी और अव्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि आश्रम में रहने वाले आदिवासी बच्चों को निर्धारित मेनू के अनुसार भोजन नहीं मिल रहा है। वहीं, सोने के लिए उपलब्ध गद्दों की खराब स्थिति और भवन की टूटी खिड़कियां भी बच्चों की परेशानी बढ़ा रही हैं।

मेनू के अनुसार भोजन नहीं मिलने की शिकायत

आश्रम में भोजन की गुणवत्ता को लेकर बच्चों ने शिकायत की है। उनके अनुसार, दाल के नाम पर बेहद पतली दाल परोसी जाती है और भोजन निर्धारित मेनू के अनुरूप नहीं मिलता। यदि ये शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो यह बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है।

आश्रम में रहने वाले बच्चों को पौष्टिक और निर्धारित मानकों के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराना संबंधित प्रबंधन की जिम्मेदारी है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता और मेनू के पालन की जांच जरूरी है।

फटे गद्दे और टूटी खिड़कियों से परेशानी

आश्रम की आवासीय व्यवस्था पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि बच्चों को सोने के लिए दिए गए गद्दे फटे हुए हैं और भवन की कई खिड़कियां टूटी हुई हैं। इससे बच्चों को रात में परेशानी का सामना करना पड़ता है। खिड़कियों की खराब स्थिति सुरक्षा और मौसम से बचाव के लिहाज से भी चिंता का विषय है।

बच्चों के लिए संचालित आवासीय संस्थानों में स्वच्छता, सुरक्षित भवन और पर्याप्त बिस्तरों जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करना आवश्यक है।

निरीक्षण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल

आश्रम के संचालन और निगरानी को लेकर भी लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतों के अनुसार, अधीक्षक की नियमित उपस्थिति नहीं होने और संबंधित अधिकारियों तथा मंडल संयोजक की ओर से समय-समय पर निरीक्षण नहीं किए जाने के कारण व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो पा रहा है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। मामले में आश्रम की व्यवस्थाओं की जांच कर जिम्मेदारी तय करना महत्वपूर्ण होगा।

जांच और सुधार की जरूरत

सरकेगुड़ा के बालक आश्रम से जुड़ी शिकायतें बच्चों के भोजन, आवास और सुरक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों से संबंधित हैं। ऐसे में संबंधित विभाग को आश्रम का निरीक्षण कर भोजन की गुणवत्ता, बिस्तरों की स्थिति, भवन की सुरक्षा और अधीक्षक की उपस्थिति की जांच करनी चाहिए।

यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं, तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। आदिवासी बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए संचालित आश्रमों में सुरक्षित आवास, पौष्टिक भोजन और नियमित निगरानी सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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