नासिक | महाराष्ट्र के नासिक जिले के निफाड शहर में आवारा कुत्तों के आतंक से परेशान स्थानीय लोगों ने प्रशासन के खिलाफ अनोखा और हैरान करने वाला प्रदर्शन किया है। लगातार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने से नाराज प्रदर्शनकारियों ने नगर पंचायत के चीफ ऑफिसर के दफ्तर में घुसकर उनकी टेबल के सामने चार आवारा कुत्ते छोड़ दिए।
क्या है पूरा मामला?
निफाड शहर में पिछले करीब छह महीनों से आवारा कुत्तों की समस्या काफी बढ़ गई है, जिससे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग बेहद परेशान हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि कई लोगों को कुत्ते काट भी चुके हैं।
इस अनोखे प्रदर्शन का नेतृत्व शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट की युवा सेना के जिला प्रमुख विक्रम रंधावे ने किया। उनके साथ नगरसेविका रूपाली रंधावे और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद थे। प्रदर्शनकारी सीधे निफाड नगर पंचायत के चीफ ऑफिसर धीरज भामरे के दफ्तर में पहुंचे और आवारा कुत्तों को उनकी टेबल के ठीक सामने छोड़ दिया। इस दौरान नगर पंचायत के कामकाज के विरोध में प्रतीकात्मक रूप से नोटों की दो मालाएं भी रखी गईं, जिससे ऑफिस में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
प्रशासन पर अनदेखी का आरोप
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर पहले भी कई बार प्रशासन से लिखित शिकायत की थी और तस्वीरें भी सौंपी थीं। विक्रम रंधावे के मुताबिक, करीब दो महीने पहले इस मुद्दे पर एक बैठक भी हुई थी जिसमें अधिकारियों ने सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था, लेकिन ज़मीन पर कोई असर नहीं दिखा।
गुस्साए लोगों का कहना था कि जब प्रशासन शिकायतों और बैठकों के बाद भी नहीं जागता, तो उन्हें यह अनोखा तरीका अपनाना पड़ा ताकि अधिकारियों का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर खींचा जा सके। फिलहाल, इस पूरे मामले पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आवारा कुत्तों की नसबंदी और नियंत्रण को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
मध्य प्रदेश में भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
गौरतलब है कि आवारा कुत्तों के आतंक को लेकर इस तरह का अनूठा विरोध देश के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिल चुका है। पिछले महीने ही मध्य प्रदेश के खंडवा में नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष दीपक उर्फ मुल्लू राठौर एक शख्स को कुत्ते का मुखौटा पहनाकर कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में पहुंच गए थे, जहां उन्होंने नसबंदी के नाम पर खर्च हुए बजट और बढ़ती समस्याओं पर गंभीर सवाल उठाए थे।