नई दिल्ली | यूपीआई (UPI) पर 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने के बाद से देश में राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। इस बीच, संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें एक टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल की सिफारिश की गई थी। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पार्टी और उसके सांसदों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा विवाद और बीजेपी का दावा?
हाल ही में नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने एक नया MDR फ्रेमवर्क लागू करने का ऐलान किया है, जिसके तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट (P2M) भुगतानों पर 0.4% तक का MDR लगेगा।
इस फैसले के विरोध के बीच, बीजेपी ने खुलासा किया है कि 12 अगस्त को हुई संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति की बैठक में कांग्रेस के 5 सांसद—पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ—बतौर सदस्य शामिल थे। बीजेपी का दावा है कि इस बैठक में यूपीआई के लिए एक टियर-बेस्ड रेवेन्यू मॉडल बनाने की सिफारिश की गई थी और समिति की इस रिपोर्ट पर किसी भी विपक्षी सांसद ने असहमति नहीं जताई थी। इसी आधार पर बीजेपी अब राहुल गांधी द्वारा इस फैसले के विरोध पर सवाल उठा रही है।
संसदीय समिति की रिपोर्ट में क्या था?
समिति के समक्ष पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जहां यूपीआई का बजटीय प्रावधान करीब 2,000 करोड़ रुपये है, वहीं इंडस्ट्री की अनुमानित ऑपरेशनल कॉस्ट लगभग 20,700 करोड़ रुपये है।
समिति का मुख्य तर्क यह था कि:
सरकारी बोझ कम करना: यूपीआई का विशाल इकोसिस्टम लंबे समय तक केवल सरकारी सब्सिडी और मदद के भरोसे नहीं चल सकता।
टिकाऊ मॉडल की जरूरत: नेटवर्क के रखरखाव, साइबर सुरक्षा, फ्रॉड प्रिवेंशन और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में निरंतर निवेश के लिए एक स्थायी रेवेन्यू मॉडल जरूरी है।
हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि संसदीय समिति की सामान्य सिफारिश और हाल ही में लागू किए गए 0.4% MDR के मौजूदा नियमों, सीमाओं व शर्तों को सीधे तौर पर एक ही मानना सही नहीं है।
नया MDR फ्रेमवर्क और नियम क्या कहते हैं?
इस नए विवाद के बीच सरकार और वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह चार्ज आम जनता या ग्राहकों पर सीधा बोझ नहीं है:
P2P पेमेंट पूरी तरह फ्री: अगर आप परिवार या दोस्तों (Person-to-Person) को पैसे भेजते हैं, तो राशि चाहे जितनी हो, कोई MDR नहीं लगेगा।
छोटे व्यापारी सुरक्षित: 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट पर पहले की तरह ‘जीरो-एमडीआर’ (Zero-MDR) व्यवस्था जारी रहेगी, जिससे छोटे व्यापारियों को राहत मिलेगी।
शुल्क सीमा और क्षेत्र: 2,000 रुपये से ऊपर के सामान्य P2M ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लगेगा (अधिकतम 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन)। वहीं रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसे क्षेत्रों के लिए 5 रुपये का फ्लैट चार्ज तय किया गया है, जबकि कैपिटल मार्केट के लिए इसे 0.02% रखा गया है।
सरकार का कहना है कि इस मॉडल का उद्देश्य डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आर्थिक रूप से मजबूत और सुरक्षित बनाना है, जबकि विपक्षी दल इस पर राजनीति गरमाए हुए हैं।