लखनऊ | बहुजन समाज पार्टी (BSP) से आकाश आनंद की विदाई ने एक बार फिर पार्टी के भीतर नेतृत्व और बड़े नेताओं की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं. मायावती ने 10 सितंबर को अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया. हालांकि, BSP में बड़े नेताओं के अलग होने की यह पहली घटना नहीं है. पिछले करीब एक दशक में कई ऐसे नेता पार्टी छोड़ चुके हैं, जो कभी मायावती के बेहद करीबी और भरोसेमंद माने जाते थे.
इन नेताओं में ब्रजेश पाठक, नंदगोपाल नंदी, ओम प्रकाश राजभर, बाबू सिंह कुशवाहा, दारा सिंह चौहान, स्वामी प्रसाद मौर्य, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, धनंजय सिंह और दानिश अली जैसे नाम शामिल हैं. पार्टी छोड़ने के बाद किसी ने बीजेपी का रुख किया, किसी ने कांग्रेस या समाजवादी पार्टी का दामन थामा, जबकि कुछ नेताओं ने अपनी अलग पार्टी बना ली.
ब्रजेश पाठक से शुरू होती है लंबी फेहरिस्त
ब्रजेश पाठक 2004 में BSP में शामिल हुए और उन्नाव से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. बाद में राज्यसभा सांसद भी रहे. 2016 में BSP से अलग होने के बाद उन्होंने बीजेपी का दामन थामा. 2017 में मंत्री बने और 2022 में उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम बनाए गए.
नंदगोपाल नंदी ने भी बदला राजनीतिक रास्ता
नंदगोपाल नंदी ने BSP के टिकट पर 2007 में विधानसभा चुनाव जीता और मायावती सरकार में मंत्री बने. 2012 में हार के बाद उन्होंने BSP छोड़ कांग्रेस का रुख किया. इसके बाद 2017 में बीजेपी में शामिल हो गए और योगी सरकार में मंत्री बने.
ओम प्रकाश राजभर ने बनाई अपनी पार्टी
ओम प्रकाश राजभर का BSP से पुराना रिश्ता रहा है. मायावती से मतभेद के बाद उन्होंने 2002 में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) बनाई. बाद में बीजेपी के साथ गठबंधन किया और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बने.
बाबू सिंह कुशवाहा की लंबी राजनीतिक यात्रा
बाबू सिंह कुशवाहा कभी मायावती के बेहद करीबी नेताओं में गिने जाते थे. BSP सरकार में उन्हें कई अहम मंत्रालय मिले. हालांकि बाद में NRHM घोटाले से जुड़े आरोपों के चलते उन्हें मंत्री पद से हटना पड़ा. 2016 में BSP से अलग होकर उन्होंने जन अधिकार पार्टी बनाई. 2024 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर जौनपुर से लोकसभा चुनाव जीता.
दारा सिंह चौहान का कई बार बदला सियासी ठिकाना
दारा सिंह चौहान 2007 में BSP में आए और 2009 में घोसी से सांसद बने. 2014 में BSP ने उन्हें निष्कासित कर दिया. इसके बाद वह बीजेपी में गए और योगी सरकार में मंत्री बने. बाद में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए और फिर बीजेपी में लौट आए. फिलहाल वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य हैं.
स्वामी प्रसाद मौर्य ने लगाए थे टिकट बेचने के आरोप
स्वामी प्रसाद मौर्य ने 2016 में BSP छोड़ते समय मायावती पर टिकट बेचने के आरोप लगाए थे. इसके बाद वह बीजेपी में गए और योगी सरकार में मंत्री बने. 2022 में बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए. बाद में उन्होंने अपनी पार्टी राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी बनाई.
नसीमुद्दीन सिद्दीकी भी हुए अलग
कभी मायावती के सबसे करीबी मुस्लिम चेहरों में शामिल रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी के पास BSP सरकार में कई अहम विभाग थे. 2017 में BSP से निष्कासन के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा. बाद में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए.
धनंजय सिंह ने बनाई अपनी राह
धनंजय सिंह 2008 में BSP में शामिल हुए और 2009 में जौनपुर से लोकसभा सांसद बने. 2011 में मायावती ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया. इसके बाद उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई.
दानिश अली भी नहीं टिके
दानिश अली 2019 में BSP में शामिल हुए और अमरोहा से लोकसभा चुनाव जीता. इसके बाद वह पार्टी के प्रमुख चेहरों में गिने जाने लगे. 2024 में उन्होंने BSP छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया. हालांकि कांग्रेस के टिकट पर अमरोहा से चुनाव लड़ने पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा.
अब आकाश आनंद की बारी
इन नेताओं की फेहरिस्त में अब आकाश आनंद का नाम भी जुड़ गया है. हालांकि वह इन नेताओं की तरह लंबे राजनीतिक अनुभव वाले नेता नहीं थे, लेकिन मायावती के भतीजे होने और पार्टी में बड़ी जिम्मेदारियां मिलने के कारण उनका कद काफी बड़ा था.
मायावती ने 11 सितंबर को पार्टी से निकाले गए नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग दूसरी पार्टियों के हाथों में खेलकर छोटी-छोटी पार्टियां और संगठन तक बना लेते हैं.
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि BSP से बाहर होने के बाद आकाश आनंद की अगली राजनीतिक राह क्या होगी. क्या वह भी किसी दूसरे दल का रुख करेंगे, अपनी पार्टी बनाएंगे या फिर राजनीति से अलग रास्ता चुनेंगे? इसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आएगा.