मुंबई। रिटायर कर्मचारी के 14 लाख रुपये से अधिक के पीएफ क्लेम के निपटारे में देरी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को भारी पड़ गई। मुंबई उपनगरीय जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मामले में EPFO को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 14,06,272 रुपये की क्लेम राशि पर 35 दिनों की देरी के लिए 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है।
मामला एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से जुड़ा है, जिन्होंने 19 अक्टूबर 2016 को अपने पीएफ की राशि के लिए दावा किया था। EPFO के मुताबिक, शुरुआती दस्तावेजों में जरूरी संयुक्त घोषणा पत्र नहीं था, जिसके कारण 7 नवंबर 2016 को दस्तावेज वापस कर दिए गए। संगठन का कहना था कि पूरे दस्तावेज 2 दिसंबर 2016 को प्राप्त हुए और इसके बाद 14 दिसंबर को क्लेम का निपटारा कर दिया गया।
हालांकि, उपभोक्ता आयोग ने EPFO की दलील को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि संगठन यह साबित करने में विफल रहा कि कर्मचारी का मूल दावा अधूरा था। साथ ही, EPFO की ओर से दस्तावेजों की कमी को लेकर भेजे गए किसी लिखित अस्वीकृति पत्र या पर्याप्त प्रमाण भी पेश नहीं किए गए।
20 दिन की समयसीमा में नहीं हुआ क्लेम का निपटारा
आयोग ने माना कि EPF Scheme, 1952 के तहत दावे पर निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई की जानी चाहिए थी। कर्मचारी के क्लेम के निपटारे में हुई देरी को आयोग ने ‘सेवा में कमी’ माना।
आयोग के आदेश के अनुसार, 9 नवंबर 2016 से 13 दिसंबर 2016 के बीच हुई देरी की अवधि के लिए 14,06,272 रुपये की राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करना होगा। EPFO को आदेश का पालन करने के लिए 45 दिनों की समयसीमा दी गई है।
यह फैसला उन कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्हें पीएफ क्लेम के निपटारे में अनावश्यक देरी का सामना करना पड़ता है।