दिल्ली में बुजुर्गों का अकेलापन होगा दूर, ‘वयो आनंद’ केंद्रों में मिलेंगी योग, मनोरंजन और स्वास्थ्य की सुविधाएं

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार राजधानी के वरिष्ठ नागरिकों के लिए ‘वयो आनंद’ योजना शुरू करने जा रही है। योजना के तहत 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए वरिष्ठ नागरिक मनोरंजन केंद्र विकसित किए जाएंगे। इन केंद्रों का उद्देश्य बुजुर्गों को सामाजिक रूप से सक्रिय रखने के साथ-साथ उन्हें मनोरंजन, स्वास्थ्य और रचनात्मक गतिविधियों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके सम्मान, स्वास्थ्य, सक्रिय जीवन और सामाजिक जुड़ाव को सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। ‘वयो आनंद’ केंद्रों के जरिए बुजुर्गों को अपने आसपास ही ऐसी जगह उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, जहां वे अपने हमउम्र लोगों के साथ समय बिता सकें और अकेलेपन से दूर रह सकें।

लूडो-कैरम से योग और ध्यान तक की सुविधा

‘वयो आनंद’ केंद्रों में बुजुर्गों के लिए कैरम, लूडो जैसे इनडोर गेम, टीवी, कंप्यूटर, समाचार पत्र, पत्रिकाएं और किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा नियमित रूप से योग और ध्यान की कक्षाएं भी आयोजित होंगी। केंद्रों में आराम से बैठने की व्यवस्था के साथ पंखे और कूलर जैसी बुनियादी सुविधाएं भी सुनिश्चित की जाएंगी।

हर महीने लगेगा मेडिकल कैंप

वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए केंद्रों में हर महीने चिकित्सा शिविर आयोजित किए जाएंगे। प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट-एड किट की व्यवस्था भी रहेगी। स्वास्थ्य और फिटनेस से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से बुजुर्गों को सक्रिय जीवनशैली के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

पेंटिंग, पॉटरी और आउटडोर टूर भी

योजना के तहत केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि रचनात्मक और सामाजिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। वरिष्ठ नागरिकों के लिए आउटडोर टूर, कहानी सुनाने के सत्र, पेंटिंग, क्राफ्ट और पॉटरी जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही पोषण संबंधी परामर्श और इनडोर-आउटडोर खेलों की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

साल में 5-6 विशेष कार्यक्रम

केंद्रों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, वरिष्ठ नागरिक दिवस और राष्ट्रीय पर्वों जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साल में कम से कम 5-6 ऐसे कार्यक्रम कराने का प्रावधान रखा गया है, ताकि वरिष्ठ नागरिक सामूहिक रूप से इन आयोजनों में भाग ले सकें और सामाजिक रूप से जुड़े रहें।

सुबह 7 से रात 8 बजे तक खुलेंगे केंद्र

‘वयो आनंद’ केंद्र सप्ताह में कम से कम पांच दिन संचालित किए जाएंगे। इन्हें रोजाना कम से कम सात घंटे खुला रखने का प्रावधान है। केंद्रों का संचालन सुबह 7 बजे से रात 8 बजे के बीच किया जाएगा, जिससे वरिष्ठ नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार यहां पहुंच सकेंगे।

ग्राउंड फ्लोर को मिलेगी प्राथमिकता

केंद्रों में पर्याप्त वेंटिलेशन और शौचालय की सुविधा अनिवार्य होगी। बुजुर्गों के लिए आवागमन आसान बनाने के लिए ग्राउंड फ्लोर पर स्थित स्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी। बहुमंजिला भवन में केंद्र बनाए जाने की स्थिति में लिफ्ट वाले भवनों को प्राथमिकता दी जाएगी।

महिलाओं और दिव्यांग बुजुर्गों के लिए विशेष कार्यक्रम

योजना में महिला, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतों को भी ध्यान में रखा गया है। इनके लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करने को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि सभी वर्गों के बुजुर्ग योजना से जुड़ सकें और उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

पुलिस और अस्पताल से रहेगा संपर्क

किसी भी आपात स्थिति में वरिष्ठ नागरिकों को तत्काल सहायता मिल सके, इसके लिए केंद्रों का नजदीकी पुलिस थाने और अस्पतालों से संपर्क रखा जाएगा। स्थानीय स्तर पर समन्वय के जरिए जरूरत पड़ने पर संबंधित सेवाओं तक जल्द पहुंच सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जाएगी।

200 सदस्यों वाले केंद्र होंगे पात्र

‘वयो आनंद’ योजना के तहत आर्थिक सहायता पाने के लिए केंद्र में कम से कम 200 वरिष्ठ नागरिक सदस्य होना जरूरी होगा। पात्र सदस्यों की उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। केंद्र दिल्ली में किसी सामुदायिक स्थान पर संचालित होना चाहिए। RWA, CGHS और चौपाल जैसे सामुदायिक स्थानों पर चलने वाले केंद्र भी योजना के दायरे में आ सकते हैं।

सालाना 2.40 लाख रुपये की सहायता

पात्र वरिष्ठ नागरिक मनोरंजन केंद्रों को एक वित्तीय वर्ष में 2.40 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राशि 20 हजार रुपये प्रतिमाह के हिसाब से दो बराबर छमाही किस्तों में जारी की जाएगी। इस सहायता का इस्तेमाल केंद्रों की आवश्यक सुविधाओं और विभिन्न गतिविधियों के संचालन में किया जा सकेगा।

सरकार का कहना है कि ‘वयो आनंद’ योजना का मकसद वरिष्ठ नागरिकों को सिर्फ मनोरंजन की सुविधा देना नहीं, बल्कि उन्हें सामाजिक रूप से सक्रिय, स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराना है। योजना के जरिए बुजुर्गों को उनके आसपास ही ऐसा मंच देने का प्रयास किया जा रहा है, जहां वे लोगों से मिल-जुल सकें और अपनी रुचि की गतिविधियों में हिस्सा ले सकें।

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