नई दिल्ली । दिल्ली-NCR में सड़क हादसों पर अंकुश लगाने और ट्रैफिक व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए NCR प्लानिंग बोर्ड के ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2041 में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। इसमें वाहनों की गति नियंत्रित करने, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती बढ़ाने और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है।
शहरों में कम की जा सकती है वाहनों की स्पीड
ड्राफ्ट मास्टर प्लान में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए वाहनों की गति नियंत्रित करने को अहम कदम बताया गया है। इसमें स्वीडन का उदाहरण देते हुए शहरी क्षेत्रों में 30 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा का उल्लेख किया गया है। इसी तरह की व्यवस्था दिल्ली-NCR में लागू किए जाने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
हालांकि, सभी सड़कों पर एक समान गति सीमा लागू करने के बजाय सड़क की प्रकृति, डिजाइन और उपयोग के आधार पर अलग-अलग गति सीमा निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है। इसके लिए इंडियन रोड कांग्रेस (IRC) के मानकों को आधार बनाया जा सकता है।
वाहनों में स्पीड गवर्नर और GPS का प्रस्ताव
वाहनों की रफ्तार पर निगरानी रखने के लिए ड्राफ्ट में स्पीड गवर्नर अनिवार्य करने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही सार्वजनिक और वाणिज्यिक वाहनों में GPS लगाने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है।
GPS और स्पीड गवर्नर के जरिए वाहनों की लोकेशन और गति की निगरानी आसान हो सकेगी। निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई करने में भी इससे मदद मिल सकती है।
बार-बार नियम तोड़ने वालों का लाइसेंस रद्द करने का सुझाव
ड्राफ्ट मास्टर प्लान में लगातार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर कड़ी कार्रवाई का प्रस्ताव रखा गया है। बार-बार नियम तोड़ने वालों का ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।
इसका उद्देश्य ऐसे वाहन चालकों पर प्रभावी अंकुश लगाना है, जो बार-बार यातायात नियमों की अनदेखी करते हैं।
दुर्घटना रिकॉर्ड से जुड़ सकता है बीमा प्रीमियम
सड़क सुरक्षा को लेकर एक अन्य महत्वपूर्ण सुझाव वाहन बीमा से संबंधित है। ड्राफ्ट में वाहन चालक के दुर्घटना रिकॉर्ड को बीमा प्रीमियम से जोड़ने की बात कही गई है।
खराब दुर्घटना रिकॉर्ड वाले चालकों के लिए बीमा प्रीमियम अधिक रखने की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। इससे वाहन चालकों को सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रोत्साहित करने की उम्मीद है।
आय के हिसाब से तय हो सकता है जुर्माना
ड्राफ्ट मास्टर प्लान में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर आय के आधार पर जुर्माना लगाने की व्यवस्था पर भी विचार किया गया है। इसके लिए फिनलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में लागू व्यवस्थाओं का अध्ययन किया गया है।
ड्राफ्ट में उल्लेख है कि कुछ देशों में जुर्माने की राशि व्यक्ति की शुद्ध आय और भुगतान क्षमता को ध्यान में रखकर निर्धारित की जाती है। फिनलैंड की व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कुछ मामलों में परिवार और बच्चों की संख्या जैसे कारकों को भी ध्यान में रखने का उल्लेख किया गया है।
बच्चों की सड़क सुरक्षा पर भी जोर
ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2041 में बच्चों की सड़क सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण मुद्दा माना गया है। इसमें एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया गया है कि 58 प्रतिशत अभिभावक सड़क सुरक्षा को बच्चों के लिए सबसे बड़ा जोखिम मानते हैं, जबकि करीब 70 प्रतिशत विद्यार्थी पैदल स्कूल जाते हैं।
ऐसे में स्कूलों के आसपास सुरक्षित पैदल मार्ग, बेहतर क्रॉसिंग और मजबूत सड़क सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया है।
सड़क सुरक्षा मॉडल पर बनेगी आगे की रणनीति
ड्राफ्ट मास्टर प्लान में दुनिया के अलग-अलग देशों में अपनाए जा रहे सड़क सुरक्षा मॉडल का अध्ययन कर दिल्ली-NCR में प्रभावी उपाय लागू करने पर जोर दिया गया है। प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों में कमी लाना, तेज रफ्तार पर नियंत्रण करना और यातायात नियमों के पालन को अधिक प्रभावी बनाना है।
फिलहाल ये सभी प्रावधान ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2041 के प्रस्ताव हैं। इनके लागू होने के बाद ही दिल्ली-NCR में इनके वास्तविक प्रभाव और नियमों में बदलाव की स्थिति स्पष्ट होगी।