नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ एक बड़े तेल समझौते का ऐलान किया है। ट्रंप के मुताबिक, इस समझौते के तहत अमेरिका को वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से अधिक प्रमाणित कच्चे तेल के भंडार तक व्यापक पहुंच और नियंत्रण मिलेगा। उन्होंने इसे विश्व इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील बताया है।
ट्रंप ने दावा किया कि इस समझौते से अमेरिका की कच्चे तेल तक पहुंच बढ़ेगी और वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई में इजाफा होगा। इसका असर आगे चलकर पेट्रोल की कीमतों पर भी पड़ सकता है और अमेरिकी उपभोक्ताओं को सस्ता ईंधन मिलने की उम्मीद है।
बिना खर्च के हुआ समझौता- ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस समझौते की जानकारी साझा की। उन्होंने दावा किया कि यह डील अमेरिकी करदाताओं की तरफ से बिना किसी खर्च के की गई है। ट्रंप के अनुसार, इससे अमेरिका के कुल तेल भंडार में बड़ा इजाफा होगा और अमेरिकी ऑयल रिजर्व दोगुने से भी अधिक हो सकता है।
ट्रंप ने बताया कि उनके निर्देश पर विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के साथ इस समझौते को लेकर बातचीत की।
वेनेजुएला के तेल भंडार पर अमेरिका की नजर
वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित कच्चे तेल भंडार वाले देशों में शामिल है। लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों और दोनों देशों के बीच तनाव के कारण वहां के तेल क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों की गतिविधियां सीमित रही हैं।
ट्रंप प्रशासन अब वेनेजुएला के तेल संसाधनों तक अमेरिकी कंपनियों की पहुंच बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है। ट्रंप ने पहले भी अमेरिकी तेल कंपनियों को वेनेजुएला में वापस भेजने और वहां के तेल भंडार के इस्तेमाल की बात कही थी।
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बड़ा ऐलान
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब वेनेजुएला के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव काफी बढ़ा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका लाने का ऑपरेशन चलाया था।
मादुरो को सत्ता से हटाए जाने के बाद ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों की वापसी और वहां के विशाल तेल संसाधनों के इस्तेमाल की बात कही थी।
अमेरिका की ऊर्जा नीति पर पड़ेगा असर
अगर यह समझौता वास्तविक रूप से लागू होता है, तो इसका असर अमेरिका की ऊर्जा नीति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। वेनेजुएला के बड़े तेल भंडार तक अमेरिकी पहुंच बढ़ने से कच्चे तेल की आपूर्ति में बदलाव संभव है। हालांकि, समझौते की वास्तविक शर्तें, क्रियान्वयन और इसके आर्थिक प्रभाव आने वाले समय में ही स्पष्ट होंगे।