रायगढ़ । कला और संगीत की संस्कारधानी रायगढ़ में 14 से 23 सितंबर तक रामलीला मैदान में चक्रधर समारोह 2026 का भव्य आयोजन किया जाएगा। दस दिनों तक चलने वाले इस सांस्कृतिक महाकुंभ में छत्तीसगढ़ की लोक एवं शास्त्रीय कला के साथ देशभर की विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं का संगम देखने को मिलेगा। समारोह में कुल 42 प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं, जिनमें 24 प्रस्तुतियां रायगढ़ और छत्तीसगढ़ के कलाकारों की होंगी।
समारोह के माध्यम से प्रदेश के स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर का मंच मिलेगा। रायगढ़ घराने की कथक परंपरा से लेकर बस्तर की लोकधुनों, पंडवानी, छत्तीसगढ़ी लोक संगीत और विभिन्न शास्त्रीय नृत्य विधाओं की प्रस्तुतियां दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहेंगी।
पद्मश्री कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी खास आकर्षण
चक्रधर समारोह में देश और प्रदेश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से अलंकृत कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। रायगढ़ कथक घराने के पद्मश्री रामलाल बरेठ के निर्देशन में कथक की विशेष प्रस्तुति होगी। पद्मश्री डॉ. उषा बारले पंडवानी की प्रस्तुति देंगी, जबकि पद्मश्री भारती बंधु सूफी एवं कबीर गायन से समां बांधेंगे। छत्तीसगढ़ी लोक कला के लोकप्रिय कलाकार पद्मश्री अनुज शर्मा भी अपनी प्रस्तुति देंगे। विशेष काव्य संध्या में पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा सहित देश के वरिष्ठ कवि अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेंगे।
रायगढ़ के कलाकारों को विशेष स्थान
समारोह में रायगढ़ की स्थानीय प्रतिभाओं और सांस्कृतिक विरासत को विशेष महत्व दिया गया है। श्री वेदमणि महाराज के शिष्यों द्वारा पारंपरिक गणेश वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इसके बाद भूपेंद्र बरेठ एवं समूह, विभूति शर्मा, वासंती वैष्णव एवं समूह तथा नृत्यांजलि द्वारा कथक की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। राकेश शर्मा सूफी गायन और सोनू गुप्ता एवं ग्रुप छत्तीसगढ़ी लोक संगीत की प्रस्तुति देंगे।
बस्तर से सरगुजा तक दिखेगी छत्तीसगढ़ की संस्कृति
समारोह में प्रदेश के विभिन्न अंचलों की कला को भी मंच मिलेगा। बस्तर अकैडमी ऑफ डांस, आर्ट्स एंड लिटरेचर के कलाकार बस्तर की लोक एवं आदिवासी संस्कृति की झलक प्रस्तुत करेंगे। गरियाबंद के भूपेंद्र साहू छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य, रायपुर की तरुणा साहू पंडवानी और अन्य कलाकार लोक संगीत की प्रस्तुतियां देंगे।
इंडियन आइडल फेम अमित साना सुगम गायन प्रस्तुत करेंगे। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के विद्यार्थी सामूहिक नृत्य प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा सितार वादन, ओडि़सी, कुचिपुड़ी और कथक की प्रस्तुतियां भी समारोह का हिस्सा होंगी।
देशभर की कला विधाओं का भी होगा संगम
चक्रधर समारोह में देश के विभिन्न राज्यों की शास्त्रीय और लोक कलाओं को भी मंच मिलेगा। केरल की कथकली, मणिपुर का मणिपुरी नृत्य, आंध्र-तेलंगाना की कुचिपुड़ी, तमिलनाडु और कर्नाटक की भरतनाट्यम तथा ओडिशा की ओडि़सी प्रस्तुतियां दर्शकों को देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराएंगी।
राजस्थान का लोक संगीत, जबलपुर की नृत्य नाटिका, तबला वादन तथा वृंदावन और बनारस के कलाकारों द्वारा संतूर, पखावज और तबले का संगम भी समारोह के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहेगा।
सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा व्यापक मंच
चक्रधर समारोह 2026 स्थानीय कलाकारों से लेकर राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित कलाकारों तक को एक मंच पर लाकर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को देशभर में पहुंचाने का माध्यम बनेगा। रायगढ़ घराने की कथक परंपरा, पंडवानी, बस्तर की लोक धरोहर और छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के साथ देश की विविध शास्त्रीय कला विधाओं का संगम इस आयोजन को विशेष बनाएगा।
आयोजन समिति ने कला प्रेमियों, कलाकारों, शोधार्थियों, संस्कृति अध्येताओं और आम नागरिकों से इस सांस्कृतिक महापर्व में सहभागी बनने का आह्वान किया है।