मनेंद्रगढ़ । राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत सत्र 2026-27 में शासकीय विवेकानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय मनेंद्रगढ़ में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक सत्र की शुभकामनाएं देते हुए महाविद्यालय को प्रदेश के उत्कृष्ट शासकीय संस्थानों में विकसित करने की बात कही।
कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र पर दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. श्राबनी चक्रवर्ती ने बताया कि NEP-2020 के तहत इस सत्र से हिन्दी साहित्य, इतिहास और प्राणीशास्त्र जैसे तीन नए विषय प्रारंभ किए गए हैं। पहले से संचालित चार विषयों को मिलाकर अब महाविद्यालय में कुल सात विषयों में अध्ययन की सुविधा उपलब्ध है।
शिक्षा के साथ कौशल और तकनीक जरूरी
स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि वर्तमान दौर में विद्यार्थियों के लिए पारंपरिक शिक्षा के साथ व्यावसायिक एवं कौशल आधारित शिक्षा भी जरूरी है। उन्होंने युवाओं से आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल सरकारी नौकरी हासिल करना नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल और व्यक्तित्व का विकास करना है। युवा ही विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने की सबसे बड़ी शक्ति हैं।
महाविद्यालय के विकास के लिए 1.15 करोड़ के कार्य
मंत्री ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में महाविद्यालय के विकास के लिए लगभग 1 करोड़ 15 लाख रुपये के कार्य कराए गए हैं। उन्होंने महाविद्यालय की बाउंड्रीवाल, अधूरे स्टेज की छत तथा महिला एवं पुरुष प्रसाधन कक्ष के निर्माण की घोषणा की। ऑडिटोरियम के निर्माण के लिए भी आवश्यक पहल करने की बात कही।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में उच्च शिक्षा और कौशल विकास के अवसरों का विस्तार किया जा रहा है। मनेंद्रगढ़ में मेडिकल कॉलेज, चिरमिरी में हॉर्टिकल्चर एवं पॉलिटेक्निक कॉलेज, मनेंद्रगढ़ में फिजियोथेरेपी, झगराखांड में नर्सिंग तथा खड़गवां में कृषि कॉलेज जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
NEP विद्यार्थियों को अवसरों से जोड़ने का माध्यम
कलेक्टर संतना देवी जांगड़े ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महाविद्यालय का समय केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व और भविष्य को दिशा देने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से नई तकनीक, कौशल, नवाचार और रचनात्मकता से जुड़ने तथा अनुशासन एवं सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालय की अधोसंरचना संबंधी आवश्यकताओं पर प्राथमिकता से पहल की जाएगी, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन वातावरण मिल सके।
गुरु का सम्मान करने विद्यार्थियों से किया आग्रह
स्वास्थ्य मंत्री ने विद्यार्थियों को गुरु के महत्व से अवगत कराते हुए कबीरदास के प्रसिद्ध दोहे “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है और विद्यार्थियों को सदैव अपने गुरुजनों का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से समय का सदुपयोग करने और निरंतर सीखते रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक, नवप्रवेशित विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।