छत्तीसगढ़ में शिशु संरक्षण माह का आगाज, 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों की होगी विशेष देखभाल

रायपुर । छत्तीसगढ़ में बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शिशु संरक्षण माह का नया चरण 18 अगस्त 2026 से शुरू हो गया है। स्वास्थ्य एवं महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित इस विशेष अभियान के तहत 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और समुचित विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

शिशु जीवन की शुरुआती अवस्था को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान पर्याप्त पोषण, नियमित टीकाकरण और समय पर स्वास्थ्य देखभाल बच्चों के स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव तैयार करती है। अभियान का प्रमुख उद्देश्य 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के साथ बाल मृत्यु दर को कम करना है।

बच्चों को मिलेंगी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं

शिशु संरक्षण माह के दौरान स्वास्थ्य केंद्रों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को विभिन्न स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को विटामिन-ए की खुराक दी जाएगी, जबकि 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को एनीमिया से बचाव के लिए आयरन एवं फॉलिक एसिड सिरप उपलब्ध कराया जाएगा।

नियमित टीकाकरण से छूटे बच्चों का टीकाकरण भी किया जाएगा। इसके माध्यम से खसरा, रुबेला, पोलियो, काली खांसी और टिटनेस जैसी गंभीर बीमारियों से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

आंगनवाड़ी स्तर पर बच्चों का वजन और लंबाई मापकर कुपोषित बच्चों की पहचान की जाएगी। गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को आवश्यकता के अनुसार पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाएगा। वहीं दस्त और डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए माताओं को ओआरएस और जिंक के उपयोग की जानकारी दी जाएगी।

माताओं और अभिभावकों को किया जाएगा जागरूक

अभियान में केवल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के बजाय माताओं और अभिभावकों को बच्चों के पोषण एवं देखभाल के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है। माताओं को जन्म के एक घंटे के भीतर शिशु को मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) पिलाने और शुरुआती छह माह तक केवल स्तनपान कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

छह माह की आयु पूरी होने के बाद स्तनपान के साथ पौष्टिक पूरक आहार शुरू करने की सलाह दी जाएगी। साथ ही बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए उनसे बातचीत करने, उन्हें पढ़कर सुनाने, पर्याप्त नींद देने और उम्र के अनुरूप शारीरिक गतिविधियों के अवसर उपलब्ध कराने के महत्व की जानकारी दी जाएगी।

स्वच्छता और सुरक्षित वातावरण पर जोर

अभियान के दौरान बच्चों की देखभाल में स्वच्छता और हाथ धोने की आदत को बढ़ावा दिया जाएगा। अभिभावकों को यह भी बताया जाएगा कि शिशुओं को लंबे समय तक झूले, स्ट्रोलर, बाउंसिंग सीट या अन्य बांधकर रखने वाले उपकरणों में नहीं रखा जाना चाहिए। बच्चों को सुरक्षित वातावरण में स्वतंत्र रूप से हिलने-डुलने और गतिविधियां करने का अवसर देना उनके विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

शिशु संरक्षण माह को सफल बनाने में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, मितानिन/आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और अभिभावकों की सामूहिक भूमिका महत्वपूर्ण है। सामूहिक प्रयासों से बच्चों को कुपोषण और बीमारियों से बचाने के साथ स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त पीढ़ी के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।

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