तिल्दा-नेवरा | तिल्दा-नेवरा में एक बार फिर सड़क हादसे में एक मासूम की मौत के बाद क्षेत्र की यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है। नागरिकों का कहना है कि शहर में भारी वाहनों का लगातार दबाव बना हुआ है, जबकि कई प्रमुख मार्गों पर पर्याप्त डिवाइडर और प्रभावी यातायात सुरक्षा व्यवस्था का अभाव है।
बाईपास का चुनावी वादा फिर चर्चा में
तिल्दा-नेवरा में बाईपास सड़क की मांग लंबे समय से उठती रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार विधानसभा चुनाव के दौरान बाईपास निर्माण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था और इसके निर्माण का वादा भी किया गया था। लोगों को उम्मीद थी कि बाईपास बनने से शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम होगा और सड़क हादसों पर अंकुश लगेगा।
हालांकि, स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि चुनाव के बाद बाईपास निर्माण को लेकर अपेक्षित गति नजर नहीं आई। उनका कहना है कि वादा आज भी पूरा नहीं हुआ है और भारी वाहन आबादी वाले इलाकों से होकर गुजर रहे हैं।
भारी वाहनों के दबाव से बढ़ रहा खतरा
शहर के मुख्य मार्गों पर दिन-रात ट्रक, ट्रेलर और अन्य भारी वाहनों की आवाजाही होती है। आबादी वाले क्षेत्रों और बाजार से गुजरने वाले इन वाहनों के कारण पैदल चलने वाले लोगों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा बना रहता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बाईपास का निर्माण होता है तो भारी वाहनों को शहर के बाहर से निकाला जा सकता है। इससे मुख्य मार्गों पर यातायात का दबाव कम होने के साथ दुर्घटनाओं की आशंका भी कम हो सकती है।
डिवाइडर की कमी भी बनी चिंता
बाईपास के साथ शहर के प्रमुख मार्गों पर प्रभावी डिवाइडर की कमी को भी नागरिक दुर्घटनाओं का एक महत्वपूर्ण कारण मान रहे हैं। कई स्थानों पर वाहनों की आमने-सामने आवाजाही और सड़क पार करने वाले लोगों के कारण जोखिम बढ़ जाता है। नागरिकों ने दुर्घटना संभावित स्थानों को चिन्हित कर वहां तत्काल सुरक्षा उपाय किए जाने की मांग की है।
मासूम की मौत के बाद फिर उठा सवाल
हादसे में मासूम की मौत ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा तेज कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर गंभीर हादसे के बाद बाईपास और यातायात व्यवस्था को लेकर आवाज उठती है, लेकिन कुछ समय बाद मामला शांत हो जाता है।
अब नागरिक प्रशासन और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से बाईपास निर्माण को लेकर स्पष्ट कार्ययोजना और समयसीमा की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि सड़क सुरक्षा को केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
तिल्दा-नेवरा के नागरिकों ने बाईपास निर्माण को प्राथमिकता देने, प्रमुख मार्गों पर आवश्यक डिवाइडर लगाने और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी और हादसे और किसी दूसरे परिवार के उजड़ने का इंतजार करने के बजाय अब स्थायी समाधान की दिशा में कार्रवाई जरूरी है।