रायपुर | पवित्र सावन माह में भगवान शिव के भक्तों की सुविधा के लिए उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा की पहल पर अमरकंटक स्थित मृत्युंजय आश्रम में कांवड़ यात्रियों के लिए निःशुल्क भोजन, विश्राम और सेवा की व्यवस्था की गई है। इस सेवा केंद्र में कबीरधाम जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से पहुंच रहे श्रद्धालुओं को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सावन के पहले ही दिन करीब 500 कांवड़ियों और श्रद्धालुओं ने मृत्युंजय आश्रम में प्रसादी ग्रहण की। पूरे सावन माह तक संचालित इस सेवा केंद्र में श्रद्धालुओं के लिए सुबह चाय और नाश्ता, दोपहर एवं रात्रि का सात्विक भोजन, विश्राम स्थल, पेयजल, स्वच्छ शौचालय और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में संचालित इस सेवा अभियान में समिति के सदस्य लगातार श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे हुए हैं और कांवड़ यात्रियों को हरसंभव सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का विशेष समय होता है और शिवभक्तों की सेवा करना भगवान शिव की सेवा के समान है। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा कठिन होती है, इसलिए उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो और वे श्रद्धा एवं विश्वास के साथ अपनी भक्ति पूरी कर सकें।
बताया गया कि पिछले वर्ष इस सेवा केंद्र का लाभ करीब 80 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने लिया था। इस वर्ष भी अमरकंटक पहुंचने वाले कांवड़ यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए व्यवस्थाओं का विस्तार किया गया है।
खुड़िया और लमनी में भी सुविधाओं का विस्तार
कांवड़ यात्रियों की सुविधा के लिए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों से खुड़िया और लमनी में लगभग 20-20 लाख रुपये की लागत से आधुनिक प्रतीक्षालयों का निर्माण कराया गया है। इसके अलावा श्रावण मास के दौरान आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर श्रद्धालुओं को तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सके।
श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह
कबीरधाम सहित अन्य क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं का मृत्युंजय आश्रम में गर्मजोशी से स्वागत किया गया। सेवा केंद्र में मिल रही सुविधाओं को लेकर श्रद्धालुओं ने संतोष और प्रसन्नता व्यक्त की।
अमरकंटक स्थित यह सेवा केंद्र अब केवल भोजन और विश्राम स्थल नहीं, बल्कि आस्था, सहयोग और मानव सेवा का प्रतीक बनता जा रहा है। यहां भक्ति के साथ सेवा और सामाजिक सहभागिता का अनूठा उदाहरण देखने को मिल रहा है।