रायपुर। छत्तीसगढ़ में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि सरकार आगामी शीतकालीन सत्र में UCC विधेयक को विधानसभा में पेश कर पारित कराने का प्रयास करेगी। बिल के कानून बनने के बाद छत्तीसगढ़ देश का पांचवां राज्य बन जाएगा, जहां समान नागरिक संहिता लागू होगी।
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति की पहली बैठक आयोजित हुई। इसके साथ ही प्रदेश में UCC का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है।
समिति लेगी आम जनता और विभिन्न वर्गों से सुझाव
UCC समिति राज्य के सामाजिक, कानूनी और अन्य पहलुओं का अध्ययन करेगी। इसके लिए अलग-अलग वर्गों, संगठनों और हितधारकों से सुझाव लिए जाएंगे। समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।
5 सदस्यीय समिति का हुआ गठन
छत्तीसगढ़ सरकार ने UCC का मसौदा तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई है। इसमें शामिल हैं—
- जस्टिस (रिटायर्ड) रंजना प्रकाश देसाई – अध्यक्ष
- शत्रुघ्न सिंह (रिटायर्ड IAS) – सदस्य
- एम.के. राउत – सदस्य
- मोहन पवार (वरिष्ठ अधिवक्ता) – सदस्य
- ज्योति रानी सिंह (रिटायर्ड प्राचार्य) – सदस्य
कैबिनेट से मिल चुकी है मंजूरी
राज्य कैबिनेट ने 15 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद 26 जून 2026 को सरकार ने समिति गठन से जुड़ा आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया। अब समिति की पहली बैठक के साथ ही कानून का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है।
क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड?
यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करना है। संविधान के अनुच्छेद-44 में राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश दिया गया है।
सरकार का कहना है कि UCC लागू होने से नागरिक कानूनों में समानता आएगी, न्याय प्रक्रिया सरल होगी और महिलाओं को समान अधिकार मिलेंगे।
देश में इन राज्यों में चल रही UCC प्रक्रिया
उत्तराखंड में UCC लागू हो चुका है और यह देश का पहला राज्य बना था। इसके अलावा मध्यप्रदेश और असम में भी UCC को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। गुजरात में भी इस दिशा में पहल की गई है।
छत्तीसगढ़ सरकार अब समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। इसके बाद शीतकालीन सत्र में विधेयक विधानसभा में लाने की तैयारी है।