छात्रा के साहसिक स्टिंग के बाद हरकत में हाईकोर्ट, शिक्षा सचिव से मांगा शपथ पत्र

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महासमुंद जिले के भंवरपुर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय में 12वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान कथित नकल प्रकरण और एक छात्रा द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई जनहित याचिका (PIL) के रूप में शुरू की है।

अदालत ने राज्य के स्कूल शिक्षा सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने यह भी पूछा है कि मीडिया रिपोर्टों में नकल कराने के आरोपों में जिन शिक्षकों के नाम सामने आए हैं, उनके खिलाफ अब तक क्या दंडात्मक कार्रवाई की गई है।

छात्रा के स्टिंग ऑपरेशन से खुला मामला

मामला महासमुंद जिले के बसना ब्लॉक के रोहिणी गांव की छात्रा नीता जगत से जुड़ा है। सरस्वती शिशु मंदिर की छात्रा नीता का परीक्षा केंद्र स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, भंवरपुर में बनाया गया था।

आरोप है कि परीक्षा के दौरान छात्रा ने देखा कि कुछ शिक्षक स्वयं विद्यार्थियों को उत्तर लिखवा रहे थे और परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन का खुलेआम इस्तेमाल हो रहा था। इस पर उसने गुप्त रूप से स्टिंग ऑपरेशन कर कथित नकल की गतिविधियों का वीडियो रिकॉर्ड किया।

विरोध करने पर प्रताड़ना का आरोप

छात्रा का आरोप है कि जब उसने परीक्षा केंद्र में हो रही कथित अनियमितताओं का विरोध किया, तो केंद्र अधीक्षक और विद्यालय के प्राचार्य ने उसकी शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय उसे फटकार लगाई। इतना ही नहीं, अंग्रेजी परीक्षा के दौरान उसकी डेस्क पर पहले से उत्तर लिखकर उसे झूठे मामले में फंसाने की कोशिश भी की गई।

लगातार मानसिक दबाव के कारण छात्रा की तबीयत बिगड़ गई। इसके बावजूद उसने हार नहीं मानी और जिला स्तर पर सुनवाई नहीं होने पर रायपुर स्थित माध्यमिक शिक्षा मंडल कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।

तीन महीने में जांच पूरी करने का आश्वासन

सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले की विभागीय जांच जारी है और तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर के पहले सप्ताह में निर्धारित की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा की निष्पक्षता से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को गंभीरता से देखा जाएगा।

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