नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली में बढ़ते भूजल दोहन और अवैध बोरवेल पर नियंत्रण के लिए दिल्ली सरकार नई बोरवेल पॉलिसी लाने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, नीति का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत दिल्ली में मौजूद सभी घरेलू और व्यावसायिक बोरवेल पर वाटर मीटर लगाना अनिवार्य किया जाएगा, ताकि भूजल के उपयोग की सटीक निगरानी की जा सके।
सरकार का उद्देश्य भूजल के अनियंत्रित दोहन को रोकना, जल संसाधनों का संरक्षण करना और भूजल प्रबंधन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना है। वाटर मीटर के जरिए यह पता लगाया जा सकेगा कि किस क्षेत्र में कितना भूजल निकाला जा रहा है और उसी के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।
बोरवेल उपयोग के आधार पर लगेगा शुल्क
प्रस्तावित नीति के तहत सभी बोरवेल कनेक्शनों पर मीटर लगाए जाएंगे और जमीन से निकाले गए पानी की मात्रा के आधार पर उपयोग शुल्क लिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल बोरवेल को अनुमति देना नहीं, बल्कि उनकी लगातार निगरानी करना है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मीटर से यह रिकॉर्ड किया जाएगा कि किसी उपभोक्ता ने कितनी मात्रा में भूजल निकाला है। इसी आधार पर शुल्क तय कर बिल जारी किया जा सकता है।
अवैध बोरवेल को नियमित करने का भी प्रावधान
नई नीति में वर्तमान में संचालित हजारों अवैध बोरवेल को नियमित करने का प्रावधान भी शामिल किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि अवैध बोरवेल को कानूनी दायरे में लाकर उनकी निगरानी करना आसान होगा और भूजल के दुरुपयोग पर नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
अधिकारियों के अनुसार, अभी केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) के पास अवैध भूजल दोहन के मामलों में पर्यावरण मुआवजा लगाने का अधिकार है, लेकिन वैध रूप से निकाले जाने वाले भूजल के लिए कोई निर्धारित शुल्क व्यवस्था नहीं है। इसी को देखते हुए भूजल उपयोग शुल्क तय करने के लिए संबंधित एजेंसियों से सुझाव मांगे गए हैं।
अवैध बोरवेल की पहचान के लिए होगा घर-घर सर्वे
दिल्ली सरकार अवैध बोरवेल की पहचान के लिए जल्द ही घर-घर सर्वे कराने की तैयारी में है। अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में बोरवेल निजी परिसरों के अंदर बने हुए हैं, जिससे उनकी पहचान करना चुनौतीपूर्ण है।
सर्वे के दौरान पानी के कनेक्शन की जांच के साथ-साथ घरों में मौजूद बोरवेल की जानकारी भी जुटाई जा सकती है। इससे अवैध बोरवेल की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी।
मौजूदा व्यवस्था में निगरानी की कमी
वर्तमान नियमों के अनुसार, दिल्ली में बिना अनुमति बोरवेल लगाना प्रतिबंधित है। बोरवेल लगाने के लिए दिल्ली जल बोर्ड (DJB), जिला प्रशासन, केंद्रीय भूजल बोर्ड और अन्य एजेंसियों की जिला स्तरीय समितियां अनुमति देती हैं।
हालांकि, वर्ष 2010 से लागू व्यवस्था में अनुमति मिलने के बाद भूजल निकासी की मात्रा की निगरानी के लिए कोई प्रभावी तंत्र नहीं है। नई नीति में इसी कमी को दूर करने के लिए वाटर मीटर और नियमित यूजर चार्ज लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है।
दिल्ली सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से भूजल उपयोग पर बेहतर नियंत्रण स्थापित होगा और राजधानी में जल संसाधनों के संरक्षण को मजबूती मिलेगी। नीति का मसौदा आगे सुझावों के लिए केंद्रीय भूजल बोर्ड को भेजा गया है।