मुंगेली | मुंगेली जिले के जरहागांव में करंट लगने से एक युवक की मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा। अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और उपचार में कथित लापरवाही का आरोप लगाते हुए लोगों ने शनिवार देर रात जरहागांव बस स्टैंड पर नेशनल हाईवे को करीब आधे घंटे तक जाम कर धरना-प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन का नेतृत्व भाजपा नेता एवं नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि वेदप्रकाश ने किया। प्रदर्शनकारियों ने दोषी चिकित्सकों पर कार्रवाई, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त डॉक्टरों की नियुक्ति और मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की।
जानकारी के अनुसार, नगर निवासी गोविन्द साहू उर्फ गोलू करंट की चपेट में आ गए थे। परिजन उन्हें तत्काल उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि उस समय अस्पताल में ड्यूटी पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था और प्राथमिक उपचार देने के बजाय उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
गंभीर हालत में गोविन्द साहू को जिला अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। उनका कहना है कि यदि समय पर डॉक्टर उपलब्ध होते और तत्काल इलाज मिलता, तो युवक की जान बचाई जा सकती थी।
आक्रोशित लोगों ने देर रात जरहागांव बस स्टैंड पर नेशनल हाईवे जाम कर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। चक्काजाम के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और करीब 30 मिनट तक यातायात प्रभावित रहा।
प्रदर्शनकारियों ने घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नियमित डॉक्टरों की नियुक्ति तथा मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता और मुआवजा देने की मांग की।
सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को उनकी मांगें उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ और यातायात बहाल हो गया।
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक अस्पताल प्रबंधन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ डॉ. कमलेश खैरवार से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और उपचार में लापरवाही के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।