नारायणपुर । छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और दुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र में विकास की एक नई मिसाल सामने आई है। जिला मुख्यालय नारायणपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम कस्तूरमेटा में जल जीवन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीणों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है।
कभी पीने के पानी के लिए नदी, नालों और पहाड़ी झरनों पर निर्भर रहने वाला यह गांव आज उन चुनिंदा गांवों में शामिल हो गया है, जहां हर घर तक नल के माध्यम से सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है।
महिलाओं को मिली बड़ी राहत
जल जीवन मिशन की शुरुआत से पहले गांव की महिलाओं को कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता था। इस प्रक्रिया में उनका काफी समय और श्रम खर्च होता था, जिसका असर बच्चों की पढ़ाई और परिवार की आजीविका पर भी पड़ता था। साथ ही दूषित पानी के कारण जलजनित बीमारियों का खतरा भी बना रहता था।
सोलर टंकी और पाइपलाइन से बदली व्यवस्था
कलेक्टर के निर्देश पर तैयार विशेष कार्ययोजना के तहत गांव में बुनियादी ढांचे का विकास किया गया। बिजली की अनिश्चितता को देखते हुए 10 हजार लीटर क्षमता की सोलर आधारित पानी टंकी स्थापित की गई। इसके अलावा लगभग 2700 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर सभी 25 परिवारों को नल कनेक्शन से जोड़ा गया, जिससे नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित हो सकी।
स्वास्थ्य में सुधार, ‘हर घर जल उत्सव’ का आयोजन
स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से ग्रामीणों के स्वास्थ्य में सुधार देखा गया है और मौसमी बीमारियों में कमी आई है। इस उपलब्धि को लेकर गांव में हाल ही में ‘हर घर जल उत्सव’ का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों को जल संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने जल स्रोतों की सुरक्षा और संरक्षण का संकल्प भी लिया।
विकास की नई मिसाल
अबूझमाड़ के सुदूर क्षेत्र में स्थित कस्तूरमेटा गांव की यह सफलता दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से दूरस्थ इलाकों में भी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति बदल सकती है और लोगों के जीवन स्तर में स्थायी सुधार संभव है।