कोलकाता। पश्चिम बंगाल के स्कूलों में मिड-डे मील व्यवस्था को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार के तहत कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के स्कूलों में भोजन आपूर्ति की जिम्मेदारी इस्कॉन (ISKCON) को दिए जाने के फैसले के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
सरकारी निर्णय के तहत ISKCON को करीब 1,800 से अधिक स्कूलों में मिड-डे मील पकाने और वितरित करने की जिम्मेदारी दी गई है। इससे लगभग एक लाख छात्रों को भोजन सुविधा मिलने की बात कही जा रही है।
इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि नए मेन्यू में अंडों को हटाया जा सकता है और उनकी जगह शाकाहारी प्रोटीन विकल्प शामिल किए जाएंगे। हालांकि ISKCON ने स्पष्ट किया है कि अभी कोई अंतिम मेन्यू तय नहीं हुआ है और अंडों को लेकर फैल रही खबरें भ्रामक हैं।
TMC का हमला
इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने केंद्र और विपक्ष पर निशाना साधा है। पार्टी नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया कि यह कदम बच्चों के पोषण के साथ समझौता है और शाकाहारी एजेंडा थोपने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने इसे राजनीतिक हस्तक्षेप बताते हुए कहा कि बंगाल की खाद्य परंपरा और पोषण जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
BJP पर भी आरोप-प्रत्यारोप
TMC नेताओं ने BJP पर भी आरोप लगाए कि वह राज्यों की नीतियों में दखल देकर सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों को राजनीतिक रंग दे रही है। वहीं विपक्ष ने सरकार पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है।
ISKCON की सफाई
इस्कॉन की ओर से कहा गया है कि संस्था का उद्देश्य केवल पौष्टिक और सात्विक भोजन उपलब्ध कराना है। मेन्यू को लेकर अंतिम फैसला सरकार और संबंधित विभागों के साथ चर्चा के बाद ही होगा।
क्यों बढ़ा विवाद?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद सिर्फ भोजन नीति का नहीं, बल्कि पोषण बनाम सांस्कृतिक-धार्मिक भोजन प्राथमिकताओं का भी मुद्दा बन गया है। बंगाल में मांसाहारी भोजन खासकर अंडा और मछली, बच्चों के पोषण कार्यक्रम का अहम हिस्सा रहे हैं।
आगे क्या?
फिलहाल सरकार की ओर से अंडों को हटाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक बयानबाज़ी के चलते यह मुद्दा राज्य की सियासत में गर्म बना हुआ है।